नई दिल्ली, अक्टूबर 4। टैक्स चोरी से जुड़े पैंडोरा पेपर्स में अनिल अंबानी और किरण मजूमदार शॉ का भी नाम आया है। ग्लेनटेक, जिसके पास बायोकॉन लिमिटेड के शेयर हैं, की 99 प्रतिशत हिस्सेदारी जॉन मैक्कलम मार्शल शॉ के पास है, जो एक ब्रिटिश नागरिक और किरण मजूमदार शॉ के पति हैं। किरण बायोकॉन लिमिटेड की कार्यकारी अध्यक्ष हैं, जो 7,360 करोड़ रुपये की बायोटेक्नोलॉजी एंटप्राइज है। वहीं फरवरी 2020 में तीन चीनी बैंकों के साथ विवाद के बाद अनिल अंबानी ने लंदन की एक अदालत को बताया था कि उनकी कुल संपत्ति शून्य थी। तब अदालत ने नोटिस लिया था कि क्या अंबानी की ऑफशोर संपत्ति है, क्योंकि यदि ऐसा है तो उन संपत्तियों को घोषित नहीं किया गया है।
ग्लेनटेक का ट्रस्ट
इस साल 8 जुलाई को मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने एलेग्रो कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड और इसके मैजोरिटी शेयरधारक, बेंगलुरु हेडक्वार्टर वाली कुणाल अशोक कश्यप को एक साल के लिए शेयर बाजार में ट्रेड करने से रोक दिया था। उन पर बायोकॉन शेयर्स में इनसाइडर ट्रेडिंग का आरोप था। एलेग्रो और अशोक कश्यप पर सेबी ने जुर्माना भी लगाया था। सेबी या रेगुलेटर अथॉरिटीज को तब यह नहीं पता था कि कुणाल कश्यप मॉरीशस स्थित ग्लेनटेक इंटरनेशनल, 'सेटलर' द्वारा जुलाई 2015 में न्यूजीलैंड में स्थापित डीनस्टोन ट्रस्ट के 'संरक्षक' हैं। यही वो ग्लेनटेक है, जिसकी बायोकॉन में हिस्सेदारी है।
कितनी है हिस्सेदारी
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार 30 जून 2021 को ग्लेनटेक की बायोकॉन लिमिटेड में 19.76 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, जिसकी वैल्यू उस दिन 404 रुपये प्रति शेयर के बाजार मूल्य के आधार पर 9,583 करोड़ रुपये थी। सेटलर के रूप में, ग्लेनटेक डीनस्टोन ट्रस्ट का प्रमुख आर्थिक योगदानकर्ता है। असल में कश्यप ट्रस्ट के फाइनेंशियल एडवाइजर्स और संरक्षक हैं, जिसका फंड ग्लेनटेक से आता है।
अनिल अंबानी का मामला
कोर्ट ने अनिल अंबानी को तीन महीने बाद बैंकों को 71.6 करोड़ डॉलर का भुगतान करने का आदेश दिया गया था। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और दुनिया भर में किसी भी कंपनी में कोई संपत्ति या लाभकारी हिस्सेदारी होने से इनकार किया। द इंडियन एक्सप्रेस द्वारा जांचे गए पैंडोरा पेपर्स के रिकॉर्ड से पता चलता है कि रिलायंस एडीए समूह के अध्यक्ष और उनके प्रतिनिधियों के पास जर्सी, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (बीवीआई) और साइप्रस में कम से कम 18 ऑफशोर कंपनियां हैं।
जर्सी में अनिल अंबानी की तीन कंपनियां
2007 और 2010 के बीच स्थापित 18 ऑफशोर कंपनियों में से सात कंपनियों ने उधार लिया है और कम से कम 1.3 अरब डॉलर का निवेश किया। जर्सी में अनिल अंबानी के पास तीन कंपनियां थीं, जिनमें बैटिस्ट अनलिमिटेड, रेडियम अनलिमिटेड और हुई इन्वेस्टमेंट अनलिमिटेड शामिल हैं। इन्हें दिसंबर 2007 और जनवरी 2008 के बीच शुरू किया गया था।
रिलायंस इनोवेटर्स की कंपनियां
बैटिस्ट अनलिमिटेड और रेडियम अनलिमिटेड रिलायंस इनोवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड की कंपनियां हैं, जो एडीए ग्रुप की होल्डिंग वाली कंपनी है। हुई इन्वेस्टमेंट अनलिमिटेड का स्वामित्व एएए एंटरप्राइजेज लिमिटेड (2014 से रिलायंस इनसेप्टम प्राइवेट लिमिटेड) के पास है, जो रिलायंस कैपिटल की प्रमोटर कंपनी है। ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में, अनिल अंबानी के पास नॉर्दर्न अटलांटिक कंसल्टेंसी सर्विसेज ग्रुप अनलिमिटेड और इसकी दो सहायक कंपनियां नॉर्दर्न अटलांटिक ट्रेडिंग अनलिमिटेड और नॉर्दर्न अटलांटिक इन्वेस्टमेंट्स अनलिमिटेड थीं। तीनों को 2010 में स्थापित किया गया था।


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