Stock Market: पिछले हफ्ते भारतीय शेयर बाजार पर कई कारणों का दबाव देखने को मिला। इसमें इजराइल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव, अमेरिका की टैरिफ नीति को लेकर बनी अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की बिकवाली शामिल हैं। शुक्रवार को सेंसेक्स 573 अंकों की गिरावट के साथ 81,118 पर बंद हुआ और निफ्टी 169 अंक गिरकर 24,718 पर क्लोज हुआ। अगले हफ्ते शेयर बाजार में हलचल देखने को मिल सकती है। इसके पीछे ये 5 अहम फैक्टर्स शामिल हैं।

इजराइल-ईरान तनाव
अगले हफ्ते ग्लोबल मार्केट पर सबसे बड़ा असर इजराइल और ईरान के बीच चल रहे तनाव की खबरों का हो सकता है। हाल के दिनों में मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में तनाव बढ़ता जा रहा है, जिससे यह चिंता पैदा हो गई है कि इजराइल और ईरान के बीच चल रहा विवाद और ज्यादा गंभीर हो सकता है और इसका दायरा भी बढ़ सकता है। मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, वॉल स्ट्रीट जर्नल में जानकारी दी गई है कि अमेरिका अब इजराइल-ईरान तनाव में ज्यादा सीधे तौर पर शामिल होता नजर आ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की सेना उन ईरानी मिसाइलों को मार गिरा रही है जो इज़राइल पर दागी गई थीं। ये कार्रवाई इजराइल द्वारा ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों और मिलिट्री लीडर्स पर किए गए हमलों के जवाब में हो रही है।
अमेरिकी FOMC बैठक
अमेरिका की फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक 17 जून से शुरू होकर 18 जून तक होगी। यह बैठक निवेशकों के लिए खास है। ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। इसकी वजह यह है कि अमेरिका की टैरिफ नीति का अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा, इसे लेकर अब भी अनिश्चितता बनी हुई है। हाल ही में आए महंगाई के आंकड़े यह दिखाते हैं कि कीमतों में बढ़ोतरी फिलहाल बहुत ज्यादा नहीं है।
क्रूड ऑयल की कीमतें
शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 7% की तेज बढ़ोतरी के बाद अब निवेशकों की नजर अगले हफ्ते कच्चे तेल की कीमतों की दिशा पर टिकी रहेगी। भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल इंपोर्टर्स में से एक है। अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इससे देश का व्यापार घाटा बढ़ सकता है। इसके साथ ही रुपया कमजोर हो सकता है, महंगाई का खतरा बढ़ सकता है और कंपनियों की मुनाफे की मार्जिन घट सकती है क्योंकि इनपुट कॉस्ट यानी लागत बढ़ जाएगी।
एफपीआई का मूवमेंट
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) जून महीने में अब तक भारतीय शेयर बाजार में नेट सेलर के रूप में सामने आए हैं। जून में अब तक एफपीआई ने कैश सेगमेंट में करीब ₹4,812 करोड़ के भारतीय शेयर बेच दिए हैं। इसके पीछे मुख्य कारण हैं बढ़ता जियो पॉलिटिकल टेंशन (जैसे इजराइल-ईरान संकट), घरेलू बाजार का महंगा वैल्यूएशन और रुपये की कमजोरी । अगर एफपीआई की बिकवाली इसी तरह जारी रही, तो इससे भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बना रह सकता है और बाजार निचले स्तरों पर बना रह सकता है।
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