शेयर बाजार में आज यानी 21 अक्टूबर को एक बड़े आईपीओ की शुरुआत हो गई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल सेवा कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ निवेशकों के लिए खुल गया है। करीब 30,188 करोड़ रुपये के इस आईपीओ पर बाजार की नजरें टिकी हैं। कंपनी का इश्यू 23 अक्टूबर तक खुला रहेगा।

जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपने आईपीओ के लिए प्रति शेयर 1,065 रुपये से 1,119 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है। निवेशकों को एक लॉट में 12 शेयरों के लिए आवेदन करना होगा। इस हिसाब से ऊपरी प्राइस बैंड पर खुदरा निवेशकों को कम से कम 13,428 रुपये लगाने होंगे। आवेदन की अंतिम तारीख 23 अक्टूबर 2026 है। यह आईपीओ पूरी तरह से नए शेयर जारी करने का है। इसके तहत कंपनी करीब 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी करेगी।
Reliance Shareholders के लिए भी मौका-
इस आईपीओ में पात्र रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये तक के शेयर आरक्षित किए गए हैं। वहीं, कंपनी के पात्र कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये तक का हिस्सा रखा गया है। कर्मचारियों को अंतिम इश्यू प्राइस पर 54 रुपये प्रति शेयर की छूट भी मिलेगी। हालांकि, रिलायंस इंडस्ट्रीज के सभी शेयरधारक अपने आप इस श्रेणी के लिए पात्र नहीं होंगे। इसके लिए तय पात्रता शर्तों को पूरा करना जरूरी है। कंपनी के मुताबिक, 14 अक्टूबर 2026 तक रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर रखने वाले पात्र निवेशक शेयरधारक श्रेणी में आवेदन कर सकते हैं।
जियो प्लेटफॉर्म्स के कारोबार पर क्यों है नजर?
जियो प्लेटफॉर्म्स भारत के डिजिटल और टेलीकॉम क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में शामिल है। इसकी टेलीकॉम इकाई रिलायंस जियो देशभर में करोड़ों ग्राहकों को मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं देती है। कंपनी की कारोबारी संभावनाएं केवल टेलीकॉम तक सीमित नहीं हैं। डिजिटल सेवाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में विस्तार भी इसकी भविष्य की रणनीति का हिस्सा है।
कंपनी को मेटा और गूगल जैसे वैश्विक निवेशकों का समर्थन हासिल है। हालांकि, आईपीओ में निवेश का फैसला सिर्फ कंपनी की लोकप्रियता या बाजार में चर्चा के आधार पर नहीं करना चाहिए। निवेशकों को कंपनी की कमाई, मूल्यांकन, भविष्य की विकास दर और जोखिमों को भी समझना चाहिए।
क्या निवेशकों को आवेदन करना चाहिए?
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में निवेशकों की दिलचस्पी इसके बड़े आकार और डिजिटल कारोबार की संभावनाओं के कारण है। लेकिन किसी भी आईपीओ में लिस्टिंग के दिन मुनाफा मिलने की गारंटी नहीं होती। शेयर बाजार की स्थिति, कंपनी का मूल्यांकन और लिस्टिंग के समय मांग, शेयर के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं। निवेशकों को आवेदन करने से पहले कंपनी के रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) में दी गई वित्तीय जानकारी और जोखिमों को पढ़ना चाहिए। केवल ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) के आधार पर निवेश का फैसला करना उचित नहीं है, क्योंकि यह अनौपचारिक संकेतक है और लिस्टिंग के वास्तविक प्रदर्शन की गारंटी नहीं देता।
[Disclaimer: यहां व्यक्त किए गए विचार और सुझाव केवल व्यक्तिगत विश्लेषकों या इंस्टीट्यूशंस के अपने हैं। ये विचार या सुझाव Goodreturns.in या ग्रेनियम इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (जिन्हें सामूहिक रूप से 'We' कहा जाता है) के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। हम किसी भी कंटेंट की सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी, समर्थन या ज़िम्मेदारी नहीं लेते हैं, न ही हम कोई निवेश सलाह प्रदान करते हैं या प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) की खरीद या बिक्री का आग्रह करते हैं। सभी जानकारी केवल सूचनात्मक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए प्रदान की जाती है और कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले लाइसेंस प्राप्त वित्तीय सलाहकारों से स्वतंत्र रूप से सत्यापित जरूर करें।]


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