देश के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को लेकर निवेशकों के बीच काफी उत्साह है। रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और टेलीकॉम कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 21 अक्टूबर को खुल चुका है और 23 अक्टूबर तक इसमें आवेदन किया जा सकता है। ऐसे में निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि इस आईपीओ में किस कैटेगरी के तहत आवेदन करना चाहिए और किस विकल्प में शेयर मिलने की संभावना बेहतर हो सकती है?

इस आईपीओ में सामान्य रिटेल निवेशकों के अलावा नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स यानी NII, क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स यानी QIB, रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों और पात्र कर्मचारियों के लिए भी अलग-अलग विकल्प हैं। हालांकि, हर कैटेगरी के लिए निवेश की रकम, पात्रता और आरक्षण की शर्तें अलग हैं। इसलिए आवेदन करने से पहले इन विकल्पों को समझना जरूरी है।
रिटेल या NII, किस कैटेगरी में करें आवेदन?
अगर आप 2 लाख रुपये तक का निवेश करना चाहते हैं, तो रिटेल कैटेगरी के तहत आवेदन कर सकते हैं। वहीं, 2 लाख रुपये से अधिक की बोली लगाने वाले निवेशक NII कैटेगरी में आते हैं। इस श्रेणी में छोटे और बड़े निवेशकों के लिए अलग-अलग उपश्रेणियां होती हैं। निवेशक को अपनी रकम और जोखिम उठाने की क्षमता के हिसाब से कैटेगरी चुननी चाहिए। ध्यान देने वाली बात यह है कि एक ही आईपीओ में कोई निवेशक रिटेल और NII, दोनों कैटेगरी में एक साथ आवेदन नहीं कर सकता। इसलिए सिर्फ शेयर मिलने की संभावना बढ़ाने के उद्देश्य से गलत कैटेगरी चुनना उचित नहीं होगा।
शेयरधारकों और कर्मचारियों को क्या मिलेगा फायदा?
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये का हिस्सा आरक्षित रखा गया है। इस कैटेगरी में आवेदन करने के लिए निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करना जरूरी है। इसके लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर खरीदने की पात्रता तारीख 14 अक्टूबर 2026 थी। इस तारीख तक पात्रता हासिल करने के लिए शेयर पहले से रखना जरूरी था। इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज, जियो प्लेटफॉर्म्स और जियो प्लेटफॉर्म्स की सहायक कंपनियों के पात्र कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये का हिस्सा आरक्षित है। कर्मचारी कैटेगरी में आवेदन के लिए भी आईपीओ के नियमों और निर्धारित सीमा का पालन करना होगा।
क्या अलग-अलग कैटेगरी में आवेदन करना सही रहेगा?
जो निवेशक पात्र शेयरधारक हैं, वे नियमों के मुताबिक शेयरधारक कैटेगरी के साथ रिटेल जैसी दूसरी पात्र कैटेगरी में भी अलग आवेदन कर सकते हैं। लेकिन रिटेल और NII में से किसी एक को ही चुनना होगा। एक ही PAN से एक ही कैटेगरी में कई आवेदन करने पर आवेदन रद्द हो सकते हैं। आईपीओ में आवेदन करने के लिए बैंक, ब्रोकर या अधिकृत प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा सकता है। UPI या ASBA के जरिए रकम ब्लॉक होती है, तुरंत खाते से कटती नहीं है। शेयर मिलने पर जरूरी रकम कटती है, जबकि आवंटन नहीं होने पर ब्लॉक रकम जारी कर दी जाती है।
[Disclaimer: यहां व्यक्त किए गए विचार और सुझाव केवल व्यक्तिगत विश्लेषकों या इंस्टीट्यूशंस के अपने हैं। ये विचार या सुझाव Goodreturns.in या ग्रेनियम इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (जिन्हें सामूहिक रूप से 'We' कहा जाता है) के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। हम किसी भी कंटेंट की सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी, समर्थन या ज़िम्मेदारी नहीं लेते हैं, न ही हम कोई निवेश सलाह प्रदान करते हैं या प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) की खरीद या बिक्री का आग्रह करते हैं। सभी जानकारी केवल सूचनात्मक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए प्रदान की जाती है और कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले लाइसेंस प्राप्त वित्तीय सलाहकारों से स्वतंत्र रूप से सत्यापित जरूर करें।]


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