Who is Sanae Takaichi; Japan First Woman Prime Minister: दुनियाभर के देशों में सत्ता संघर्ष के बीच जापान में भी एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जापान के इतिहास में पहली बार एक महिला प्रधानमंत्री का पद संभालने जा रही हैं। जापान में आयरन लेडी के नाम से मशहूर साने ताकाइची ने लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (Liberal Democratic Party LDP) के अध्यक्ष पद का चुनाव जीत लिया है।

ऐसे में अब यह पूरी संभावना है कि ताकाइची जापान के अगले प्रधानमंत्री के तौर पर पद संभालेंगी। साने ताकाइची ने सत्तारूढ़ पार्टी अध्यक्ष पद के चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री जुनिचिरो कोइजुमी के बेटे और पर्यावरण मंत्री शिंजिरो कोइजुमी को हराया है। कोइजुमी को जापान के सबसे उदारवादी नेताओं में से एक माना जाता है।
बता दें कि अक्टूबर 15 को संभावित रूप से आयोजित होने वाले विशेष संसद सत्र में प्रधानमंत्री पद के लिए चुनाव होने वाला है, जिसमें LDP प्रमुख होने के नाते ताकाइची देश की अगली पीएम चुनी जा सकती हैं।
कौन हैं साने ताकाइची?
साने ताकाइची एक कट्टर रूढ़िवादी नेता हैं, जो जापान की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए अधिक उधार लेने और खर्च करने की योजना रखती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे अमेरिका के साथ बनाए गए कठिन व्यापार समझौते को फिर से खोलने को तैयार हैं।
64 वर्षीय सना तकाइची को शनिवार को LDP का नेता चुना गया। तकाइची अपने पूर्ववर्ती शिगेरु इशिबा (Shigeru Ishiba) के सितंबर में इस्तीफा देने के बाद आयोजित पार्टी में हुए मतदान के बाद नई नेता चुनी गई हैं। हालांकि LDP के पास संसद में स्पष्ट बहुमत नहीं है, लेकिन उन्हें यह उम्मीद है कि उन्हें विधायकों का पर्याप्त समर्थन मिलेगा और वे इशिबा के स्थान पर इस महीने के अंत में प्रधानमंत्री बन जाएंगी।
ताकाइची पहले भी कई बार जापान की राजनीतिक व्यवस्था में अहम भूमिका निभा चुकी हैं। वे पूर्व आंतरिक मामलों की मंत्री रह चुकी हैं और देश की राजनीति में एक रूढ़िवादी राष्ट्रवादी नेता के रूप में जानी जाती हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ताकाइची का नेतृत्व न केवल जापान की राजनीति में लैंगिक संतुलन का प्रतीक होगा, बल्कि देश की विदेश नीति और आंतरिक दिशा में भी एक नया अध्याय जोड़ेगा।
भारत के लिए क्या है मायने?
64 वर्षीय तकाइची एक रूढ़िवादी राष्ट्रवादी नेता हैं और उन्होंने ब्रिटेन की पूर्व नेता मार्गरेट थैचर को अपना आदर्श बताया है। वे जापान के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे शिंजो आबे की सहयोगी रही हैं। ऐसे में भारत के प्रति तकाइची का झुकाव ज्यादा सकारात्मक सकता है, क्योंकि शिंजों आबे समेत एलडीपी के तमाम नेताओं के साथ भारत का सहयोग हमेशा सकारात्मक रहा है।
हालांकि उनके राष्ट्रवादी दृष्टिकोण के कारण चीन, जो जापान का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, के साथ तनाव बढ़ने की संभावनाएं भी हैं। तकाइची आबे की "फ्री और ओपन हिंद-प्रशांत" रणनीति का समर्थन करती हैं और चीन तथा उत्तर कोरिया से बढ़ते खतरों का मुकाबला करने के लिए मज़बूत रक्षा क्षमताओं की वकालत करती हैं।
वह "जापान प्रथम" विदेश नीति में विश्वास करती हैं और इस बात पर ज़ोर देती हैं कि टोक्यो को "अपने राष्ट्रीय हित में सर्वोपरि" कार्य करना चाहिए। एक चुनावी बहस के दौरान, उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ जापान के टैरिफ समझौते की आलोचना की और इसके कुछ हिस्सों को "असमान" बताया था।
तकाइची ने कितने मतों से हासिल की जीत?
पहले राउंड में पांच उम्मीदवारों पर मतदान हुआ। तकाइची ने 183 वोट प्राप्त किए, जबकि कोइजुमी को 164 वोट मिले। वर्तमान सरकार के शीर्ष प्रवक्ता योशिमासा हयाशी तीसरे स्थान पर रहे, जिन्होंने 134 वोट हासिल किए। पहले राउंड में 294 LDP विधायकों और लगभग 1 मिलियन पार्टी सदस्यों के प्रतिनिधि वोट (295 वोट) का वितरण हुआ। विधायकों ने अपेक्षाकृत मध्यम कोइजुमी का समर्थन किया, जबकि पार्टी सदस्य तकाइची को पसंद करते हैं, जिनके पास एक जोशीला कट्टर समर्थन आधार है।
वहीं, दूसरे राउंड में विधायकों की संख्या समान थी, जबकि पार्टी सदस्यों के वोट 47 थे, जो जापान के 47 प्रान्तों का प्रतिनिधित्व करते हैं। विधायकों ने दूसरे राउंड में तकाइची के पक्ष में 149-145 मतदान किया, जबकि पार्टी सदस्यों ने उन्हें 36 वोट दिए, जबकि कोइजुमी को 11 वोट मिले।


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