IT Stocks Crash: कारोबारी सप्ताह के पहले दिन शेयर बाजार भारी गिरावट के साथ खुला। इस बीच आईटी शेयर क्रैश कर गए। इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसी आईटी सेवा कंपनियों के शेयर गिरावट के साथ कारोबार कर रहे। इसी वीकेंड के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1बी वीजा शुल्क को सालाना 100,000 डॉलर (88,00,000 रुपये) तक बढ़ाने की घोषणा की हैं। इससे अमेरिका में भारतीय पेशेवरों पर प्रभाव पड़ सकता है।

IT शेयरों में आई गिरावट
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस, विप्रो, HCL टेक्नोलॉजीज, टेक महिंद्रा और कोफोर्ज जैसी दिग्गज आईटी कंपनियों के शेयरों में सोमवार, 22 सितंबर को सुबह के कारोबार में 6% तक की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी आईटी इंडेक्स 3% से ज्यादा गिरकर 35,482 पर आ गया।
टेक महिंद्रा- 6%
एमफैसिस- 5.5%
परसिस्टेंट- 5.3%
एलटीआई- 5%
कोफोर्ज- 4.1%
इन्फोसिस- 3.5%
विप्रो- 3.3%
टीसीएस- 3.3%
एचसीएल- 3%
एलटीआईमाइंडट्री- 2.80%
इन्फो एज (इंडिया)- 0.44%
IT कर्मचारियों पर प्रभाव
फिलहाल H-1बी वीजा शुल्क नियोक्ता के आकार और अन्य लागतों के आधार पर लगभग 2000 से 5000 डॉलर तक है। ये वीजा तीन साल के लिए वैध होते हैं और इन्हें अगले तीन साल के लिए रिन्यू किया जा सकता है। इस नए कदम से उन भारतीय टेक कर्मचारियों पर काफी प्रभाव पड़ेगा, जिन्हें टेक कम्पनियों और अन्य द्वारा एच-1बी वीजा पर नियुक्त किया जाता है।
पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) के अनुसार, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) 2025 में 5,505 स्वीकृत एच-1बी वीजा के साथ अमेजन (एच-1बी वीजा पर 10,044 कर्मचारी) के बाद दूसरी सबसे बड़ी लाभार्थी है। अन्य शीर्ष लाभार्थियों में माइक्रोसॉफ्ट (5,189), मेटा (5,123), एप्पल (4,202), गूगल (4,181), डेलॉइट (2,353), इंफोसिस (2,004), विप्रो (1,523) और टेक महिंद्रा अमेरिका (951) शामिल हैं।
एमओएसएल के अनुसार, गूगल, अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और मेटा जैसी बड़ी टेक कंपनियों के पास नए एच-1बी आवेदनों का हिस्सा भारतीय आईटी कंपनियों की तुलना में ज्यादा है।


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