Iran Israel War: ईरान-इजरायल तनाव का असर भारतीय कंपनियों पर भी नजर आ रहा है। अडानी से लेकर टाटा तक करीब 12 कंपनियों के बिजनेस पर असर पड़ा है। सबसे ज्यादा नुकसान अडानी पोर्ट्स को हुआ है, जिसके शेयर 10 दिनों में 10% टूट गए। वहीं, TCS, विप्रो और टेक महिंद्रा जैसी आईटी कंपनियों के प्रोजेक्ट्स पर भी सुस्ती दिख रही है। अगर हालात बिगड़ते हैं तो कारोबार और निवेश दोनों पर असर और बढ़ सकता है।

अडानी पोर्ट्स पर असर
जनवरी 2023 में अडानी पोर्ट्स ने इजरायल के गैडोट ग्रुप के साथ मिलकर हाइफा पोर्ट की 70% हिस्सेदारी खरीदी थी। करीब 1.18 अरब डॉलर की इस डील से अडानी का बड़ा दांव इजरायल पर लगा है। हाइफा पोर्ट इजरायल के कुल आयात का 30% हिस्सा संभालता है और ये एक अहम नौसैनिक अड्डा भी है।
पिछले हफ्ते ईरान ने हाइफा शहर पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं, जिससे पोर्ट को नुकसान की आशंका बढ़ गई थी। हालांकि अडानी पोर्ट्स का दावा है कि बंदरगाह सुरक्षित है और कामकाज जारी है। लेकिन क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने अडानी ग्रुप पर दबाव बढ़ा दिया है, जिसका असर उसके शेयरों पर भी दिख रहा है।
इजरायल के हाइफा पोर्ट में गौतम अडानी ने बड़ा निवेश किया है, लेकिन ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (APSEZ) के शेयर पर पड़ा है। बीते 10 दिनों में इसके शेयर करीब 10% टूट चुके हैं।
10 जून को अडानी पोर्ट का शेयर 1473.80 रुपये पर बंद हुआ था, जबकि शुक्रवार को यह 1336.80 रुपये पर खुला और शुरुआती कारोबार में गिरकर 1334.80 रुपये तक पहुंच गया। तब से अब तक इसमें लगभग 10% की गिरावट देखी जा रही है। तनाव अगर बढ़ा तो शेयर पर और दबाव आ सकता है।
टीसीएस पर असर
टाटा ग्रुप की आईटी कंपनी TCS का इजरायल से मजबूत कारोबारी जुड़ाव है। कंपनी वहां कई अहम डिजिटल प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है, जिनमें प्रोजेक्ट निंबस भी शामिल है। इसका मकसद इजरायल के सरकारी मंत्रालयों और विभागों का डेटा सुरक्षित रखना और उसे क्लाउड पर शिफ्ट करना है।
इसके अलावा भी TCS इजरायल के कई अहम मंत्रालयों के डेटा की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रहा है। ऐसे में ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव से TCS को अपने प्रोजेक्ट्स और कारोबार को लेकर चिंता सताने लगी है। हालात बिगड़ने पर कंपनी के प्रोजेक्ट्स पर असर पड़ सकता है।
इन कंपनियों पर भी पड़ा असर
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक, इजरायल से जुड़े कारोबार के चलते कई भारतीय कंपनियां तनाव की मार झेल रही हैं। TCS, विप्रो, टेक महिंद्रा और इन्फोसिस जैसी आईटी कंपनियों के प्रोजेक्ट्स पर असर दिख रहा है, निवेशक भी सतर्क हो गए हैं।
इसके अलावा, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) जैसी बड़ी कंपनियां भी इस संकट की चपेट में हैं। अगर हालात और बिगड़े तो इन कंपनियों के कारोबार और निवेश पर और दबाव बढ़ सकता है।
फार्मा कंपनियों पर भी नजर
ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, फार्मा सेक्टर की कई बड़ी भारतीय कंपनियां भी इस तनाव के बीच चर्चा में हैं। सन फार्मा, जिसकी इजरायल की टारो फार्मास्युटिकल में बहुमत हिस्सेदारी है, उस पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा डॉ. रेड्डीज और ल्यूपिन जैसी जेनेरिक दवा कंपनियों के भी इजरायल की टेवा फार्मास्युटिकल से कारोबारी संबंध हैं।
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, खनन क्षेत्र की NMDC और ज्वेलरी ब्रांड्स कल्याण ज्वेलर्स व टाइटन भी इजरायल से अपने कारोबारी रिश्तों के चलते निवेशकों की नजर में हैं। तनाव बढ़ने पर इन कंपनियों पर भी असर पड़ सकता है।


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