नई दिल्ली, 25 अक्टूबर: इंश्योरेंस एजेंटों के कमीशन की सीमा (Commission Cap) तय करने के प्रस्ताव पर चौतरफा राय मिलने के बाद, देश के बीमा नियामक (IRDAI) ने फीडबैक देने की समयसीमा 31 अक्टूबर तक बढ़ा दी है। रेगुलेटर के इस कदम से उन बदलावों का रास्ता खुल गया है, जिनसे डिस्ट्रीब्यूटर्स की कमाई घट सकती है, ग्राहकों के लिए प्रीमियम सस्ता हो सकता है और पॉलिसीधारकों का रिटर्न बढ़ सकता है। हालांकि, आज से ही नियमों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन इंश्योरेंस की कीमतों का गणित जल्द बदल सकता है।
कंसल्टेशन पेपर में अलग-अलग प्रोडक्ट और डिस्ट्रीब्यूशन चैनल के हिसाब से कमीशन की सीमा तय करने का सुझाव दिया गया है। इसमें व्यक्तिगत एजेंटों के लिए कमीशन 6.25% से 25% और डिस्ट्रीब्यूशन संस्थाओं के लिए 5% से 20% रखने की सिफारिश है। इसके साथ ही, बहु-वर्षीय योजना के तहत मैनेजमेंट खर्च (Expenses of Management) की सीमा भी सख्त की जाएगी। सभी पक्षों के सुझाव मिलने के बाद रेगुलेटर ड्राफ्ट नियम तैयार करेगा। इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि ये नियम तुरंत नहीं, बल्कि 2027 के आसपास लागू हो सकते हैं।

IRDAI कमीशन कैप: LIC प्लान्स और प्रीमियम पर क्या होगा असर?
इसे LIC की किसी पॉपुलर एंडोमेंट पॉलिसी के ₹1,00,000 के सालाना प्रीमियम के उदाहरण से समझते हैं। उद्योग की रिपोर्टों के मुताबिक, सरेंडर वैल्यू के नियमों में बदलाव के बाद एलआईसी ने पहले साल का एजेंट कमीशन घटाकर 28% कर दिया था। अब अगर लंबी अवधि की पॉलिसी पर एजेंट कमीशन की प्रस्तावित 25% कैप लागू होती है, तो पहले साल में डिस्ट्रीब्यूटर को मिलने वाला पेआउट ₹3,000 कम हो जाएगा। अगर कंपनियां इस बचत का फायदा ग्राहकों को देती हैं, तो मैच्योरिटी वैल्यू या बोनस में थोड़ा इजाफा हो सकता है (हालांकि यह हर प्लान पर अलग हो सकता है)। वहीं ULIPs की बात करें, तो ऐतिहासिक रूप से डिस्ट्रीब्यूटर पेआउट 7–9% के बीच रहा है, हालांकि हाल के दिनों में यह औसत कम रहा है।
| प्रोडक्ट का उदाहरण | मौजूदा पेआउट | प्रस्तावित कैप | ₹1,00,000 पर पहले साल की बचत |
|---|---|---|---|
| LIC एंडोमेंट (लॉन्ग टर्म, एजेंट) | 28% | 25% | ₹3,000 |
| ULIP (≤5 साल का पे टर्म, एजेंट) | 8% (अनुमानित) | 6.25% | ₹1,750 |
अभी खरीदें या इंतजार करें: IRDAI कमीशन कैप के बीच क्या करें?
मौजूदा पॉलिसीधारकों के प्रीमियम या बोनस पर फिलहाल कोई असर नहीं पड़ेगा। नए खरीदारों को भी नियम पूरी तरह अधिसूचित होने तक तुरंत दाम घटने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। अगर आपको अर्जेंट टर्म कवर या हेल्थ रिन्यूअल कराना है, तो अभी खरीद लें। वहीं, हाई-कमीशन वाली सेविंग्स पॉलिसी या क्रेडिट-लिंक्ड कवर के लिए अंतिम नियम आने तक इंतजार करना फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि कैप सख्त होने वाले हैं।
| अभी खरीदें | इंतजार करें |
|---|---|
| अर्जेंट टर्म कवर या हेल्थ रिन्यूअल; खत्म हो रहे फेस्टिवल डिस्काउंट; अंडरराइटिंग लॉक कराने के लिए। | एंडोमेंट या क्रेडिट-लिंक्ड प्लान सस्ते हो सकते हैं, अगर सख्त कमीशन कैप का फायदा कंपनियों द्वारा पास किया जाए। |
| टैक्स-ईयर प्लानिंग में बदलाव नहीं; तुरंत राइडर्स की जरूरत हो। | नियम तय होने के बाद ज्यादा स्पष्ट और सस्ते ऑनलाइन विकल्पों की तुलना करने का मौका मिलेगा। |
डिस्ट्रीब्यूशन संस्थाओं के रूप में गिने जाने वाले बैंकों और बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए इंडिविजुअल एजेंटों की तुलना में कम कमीशन कैप तय की गई है। इससे बैंकश्योरेंस (बैंकों के जरिए बीमा बिक्री) के पेआउट घट सकते हैं और बिक्री ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की तरफ शिफ्ट हो सकती है, जहां परिचालन लागत कम आती है। IRDAI के चेयरमैन अजय सेठ ने कहा, "बीमा कंपनियों को डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन के बजाय कीमतों (प्राइसिंग) के दम पर प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए।" 31 अक्टूबर के बाद ड्राफ्ट नियम सामने आने की उम्मीद है, जिन्हें 2027 के आसपास लागू किया जा सकता है।


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