नई दिल्ली, दिसंबर 28। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने मंगलवार को देश में आईपीओ (इनिशियल पब्लिक ऑफरिंगग) मार्केट में और सुधार के लिए कई नए नियमों को मंजूरी दी। सबसे अहम नियम यह है कि कंपनियों को अपने इच्छित अधिग्रहण लक्ष्य (आईपीओ के जरिए जुटाए गए पैसे से किसी अन्य कंपनी को खरीदने का टार्गेट) को अनिवार्य रूप से बताना होगा। उन्हें खरीदारी से संबंधित जानकारी देनी होगी। बता दें कि कोई भी कंपनी जब आईपीओ लेकर आती है तो पहले सेबी के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) जमा करती है। ये एक ड्राफ्ट होता है, जिसमें कंपनी और उसके आईपीओ की डिटेल के अलावा वे किसलिए आईपीओ के पैसा का इस्तेमाल करेगी ये भी बताना होता है।
टेक कंपनियों पर असर
अधिग्रहण से जुड़ा नियम कई नए जमाने की टेक कंपनियों के लिए अहम है, जिन्होंने अपने डीआरएचपी में अधिग्रहण के उद्देश्य के लिए जुटाए जाने वाले फंड के उपयोग का उल्लेख तो किया है, मगर कोई और डिटेल नहीं दी। सेबी ने आगे कहा है कि यदि कोई कंपनी अपने इच्छित अधिग्रहण लक्ष्यों का खुलासा नहीं करना चाहती (भले ही उसका लक्ष्य अनऑर्गेनिक ग्रोथ के लिए फंड का उपयोग करना हो) तो ऐसे उद्देश्यों के लिए राशि और सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए राशि कुल जुटाई जाने वाली राशि के 35 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।
ओएफएस पर बड़ा बदलाव
रेगुलेटर ने एक कंपनी के उन मौजूदा शेयरधारकों के शेयरों की मात्रा पर नई लिमिट तय की हैं। सेबी ने कहा कि आईपीओ से पहले कंपनी में 20 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी रखने वाले निवेशक ओएफएस (ऑफर फॉर सेल) में अपने आधे शेयर ही बेच पाएंगे। इसी तरह, आईपीओ से पहले किसी कंपनी में 20 फीसदी से कम हिस्सेदारी रखने वाले निवेशकों को ओएफएस में अपने शेयरों का केवल 10 फीसदी बेचने की अनुमति होगी। यह नियम स्टार्टअप्स के हालिया आईपीओ में ओएफएस के उच्च प्रतिशत को देखते हुए लिया गया है।
क्रेडिट रेटिंग एजेंसी की भूमिका बढ़ेगी
सेबी ने यह भी अनिवार्य किया है कि एक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी कंपनियों द्वारा पैसे के उपयोग (जिस मकसद से पैसा जुटाया गया है) के लिए एक निगरानी एजेंसी के रूप में काम करेगी। सेबी के मुताबिक आईपीओ फंड की निगरानी तब तक जारी रहेगी जब तक कि 100 फीसदी फंड का इस्तेमाल नहीं हो जाता। पहले ये लिमिट 95 फीसदी थी। सेबी ने कंपनियों द्वारा सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए जुटाए गए पैसे की निगरानी को भी अनिवार्य कर दिया है। पहले इसे निगरानी में नहीं रखा गया था।
निवेशकों को क्या फायदा होगा
सेबी के नये नियमों से निवेशकों को फायदा यह होगा कि वे किसी कंपनी के आईपीओ की और अच्छे से डिटेल हासिल कर सकेंगे, जिससे उन्हें बेहतर वैल्यूएशन और प्लानिंग वाली कंपनी को चुनने में आसानी होगी। यदि आप 2022 में आने वाली आईपीओ में पैसा लगाना चाहते हैं तो सेबी के नियम आपके काम आएंगे।
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