Festive Season चल रहा हैं। इस समय बहुत सारे लोग ऐसे होंगे। जो प्रॉपर्टी खरीदने का विचार कर रहे होंगे। यदि उसमें आप भी शामिल हो यानी आप भी प्रॉपर्टी खरीदने का विचार कर रहे हैं। कई बैंक और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां भी हैं, जो त्योहारों के सीजन में लोन की जो ब्याज दरें होती हैं। उसमें रियायत देती हैं। यदि आप रियल एस्टेट में निवेश करते हैं, तो फिर इसका एक बहुत बड़ा लाभ भी हैं। कि आपकी आय का रास्ता खुल जाता हैं। इसमें निवेश करने से प्रॉपर्टी का स्वामित्व, इनकम टैक्स में लाभ और किराए से आय के कई अन्य लाभ भी मिलते हैं। इसके साथ ही प्रॉपर्टी बाजार जो हैं। शेयर बाजार की तुलना में कम अस्थिर भी है।

दोनों ही प्रॉपर्टी के लाभ और हानि दोनों ही होते हैं
वैसे हम प्रॉपर्टी निवेश की बात करते हैं। तब कॉमर्शियल प्रॉपर्टी हो या फिर रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी हो दोनों ही प्रॉपर्टी के लाभ और हानि दोनों ही होते हैं। अजमेरा रियल्टी एंड इन्फ्रा लिमिटेड के डायरेक्टर धवल अजमेरा का कहना हैं कि जो रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी की तुलना में कुछ ज्यादा लागत के बाबजूद, कॉमर्शियल प्रॉपर्टी ज्यादा रेंटल रिटर्न देती है। जबकि जो रेसिडेंशियल रियल एस्टेट होती हैं। उसको व्यक्ति व्यक्तिगत उपयोग के लिए खरीदा जाता हैं या फिर लंबे व्यक्त के निवेश के लिए खरीदा जाता हैं। आपूर्ति के साथ कॉमर्शियल रियल एस्टेट की मांग लगातार बढ़ रही हैं।

निवेश के बीच फर्क कॉमर्शियल रियल एस्टेट की
जब भी रियल एस्टेट में निवेश की बात होती हैं। तब निवेशक के पास दो विकल्प होते हैं। जिसमें एक विकल्प यानी कॉमर्शियल होता हैं और वही दूसरा विकल्प यानी रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी हैं। दोनों ही विकल्प अपनी जगह सही होते हैं। मगर दोनों ही जो विकल्प होते हैं व्यक्ति के लक्ष्य और जरूरत पर निर्भर करते हैं।

कौन सी प्रॉपर्टी चुनें कॉमर्शियल या रेसिडेंशियल
अजमेरा का कहना हैं कि दोनों ही प्रॉपर्टी यानी कॉमर्शियल या रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी में निवेश दोनों प्रमुख कारकों से प्रभावित होता है। इसमें पहला तो जोखिम हैं ही और दूसरा ध्यान में रखें गए लक्ष्य। क्योंकि किराए स्थिर होते हैं। इसी वजह से लीज अग्रीमेंट ज्यादा स्पेसिफिक और ज्यादा समय के लिए होते हैं। इसी वजह से जो कॉमर्शियल प्रॉपर्टी होती हैं उसमें किरायेदार अधिक आसानी से उपलब्ध होते हैं। कॉमर्शियल प्रॉपर्टी जो होती हैं वो अधिक जेनरेट करती हैं। वही हम रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी की बात करते हैं तो किरायेदारों को न कुछ मॉर्गेज करना होता और न ही ब्याज का भुगतान करना होता है। देश में बहुत से ऐसे हिस्से हैं जहां पर रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी बेहतर रिटर्न देती हैं और इसमें कॉमर्शियल प्रॉपर्टी को तरह अधिक पैसे लगाने की जरूरत भी नहीं होती हैं। यह खरीददार पर निर्भर करता हैं कि उसको रहने के लिए घर चाहिए या फिर रिकरिंग एसेट में निवेश करना है।
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