Infosys Jobs News: जॉब ज्वाइन करने के लिए कैंडिडेट्स को ऑफर लेटर मिलने के बाद भी जॉइनिंग का इंतजार करना पड़ रहा है। कैंपस रिक्रूटमेंट करने के 2 साल बाद Infosys ने 2000 लोगों को अब जॉइनिंग डेट दी है। लेकिन कंपनी ऑफर लेटर देने के बाद भी इतना लंबा इंतजार क्यों कराया? चलिए इस मामले के बारे में आपको बताते हैं।

Infosys में इस दिन की दी गई है जॉइनिंग डेट
Infosys में जिन कैंडिडेट को नौकरी दी जा रही है उनमें से 1,000 से ज्यादा लोगों को 1 सितंबर की जॉइनिंग डेट दी गई है और 300 कैंडिडेट्स को 2 सितंबर और अन्य को जून महीने की जॉइनिंग डेट दी गई है। इन्फोसिस में साल 2022 में रोल ऑफर हुई थी।
साल 2022 में रोल ऑउट किए थे ऑफर लेटर
नैसेंट इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एम्प्लॉइज सीनेट के मुताबिक, कंपनी ने इंजीनियरों को साल 2022 में इन्फोसिस में रोल ऑफर की गई थी। उन्हें 2024 में दो प्री-ट्रेनिंग सेशन पूरे करने थे और इस साल के 19 अगस्त को सेशन खत्म हुआ है। इन्फोसिस रिक्रूटमेंट टीम ने ईमेल के माध्यम से भर्ती करने वालों को सूचित किया कि वर्चुअल प्री-ट्रेनिंग सेशन में कंपनी द्वारा प्रदान किए गए सेल्फ-लर्निंग मॉड्यूल शामिल हैं, जिसके बाद विभिन्न शहरों में इन-पर्सन असेसमेंट भी किए गए।
आखिर क्यों कंपनी ने उठाया ये कदम?
कंपनी कैंडिडेट्स की योग्यता मूल्यांकन में पास करने के बाद उन्हें व्यक्तिगत रूप से Intensive training program के लिए इन्फोसिस में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
इस ट्रेनिंग में असफल होने पर आपकी जॉइनिंग तारीख में देरी होगी। डिजिटल विशेषज्ञ इंजीनियर पदों के लिए 2023 में 200 से अधिक भर्तियां अभी भी अपनी जॉइनिंग तिथियों का इंतजार कर रही हैं। सिस्टम इंजीनियर की सैलरी 3.6 लाख रुपये हर साल है, जबकि डिजिटल विशेषज्ञ इंजीनियर के पद के लिए 6.5 लाख रुपये प्रति वर्ष है।
इंफोसिस ने जून क्वाटर की इनकम की जानकारी देने के बाद कंपनी ने वित्त वर्ष 2025 में 15,000 से 20,000 फ्रेशर्स को नियुक्त करने की योजना बनाई। इससे पहले वित्त वर्ष 2024 में 11,900 फ्रेशर्स को नियुक्त किया गया था, जो पिछले साल की तुलना में काफी कम है, जबकि पिछले वर्ष 50,000 से अधिक फ्रेशर्स को नियुक्त किया गया था।
एनआईटीईएस ने कहा है कि हाल ही में कैंपस में भर्ती हुए जिन लोगों को ऑफर मिले हैं, वे प्री-ट्रेनिंग और मूल्यांकन से गुजर चुके हैं। कैंपस भर्तियों में कंपनी की बार-बार देरी की जांच करने के लिए श्रम और रोजगार मंत्रालय के साथ एक अनुरोध दायर किया। दो साल की देरी ने कैंडिडेट्स के लिए काफी परेशानियां पैदा कर दी है।
इससे ये सवाल भी सामने उठकर आता है कि आखिर कैंडिडेट्स के मूल्यांकन में देरी क्यों की जा रही है क्योंकि इसकी वजह से लोगों को ऑफर लेटर मिलने के बाद भी स्टेबिलिटी नहीं मिलने का डर कायम हो रहा है।


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