Infosys: भारत की दूसरी सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी इंफोसिस ने कहा है कि कंपनी Moonlighting का समर्थन नहीं करती है। कंपनी ने बताया कि उसने पिछले 12 महीनों में दोहरे रोजगार वाले कर्मचारियों को निकाल दिया है। हालांकि, इंफोसिस ने कर्मचारियों की सही संख्या का खुलासा नहीं किया है। लेकिन उन्होनें यह कहा है कि कंपनी ने मूनलाइटिंग करने वाले कर्मचारियों को कंपनी से बाहर कर दिया है।
विप्रो ने भी मूनलाइटिंग पर उठाया था सवाल
पिछले महीने विप्रो के चेयरमैन ऋषद प्रेमजी ने खुलासा किया कि विप्रो ने लगभग 300 कर्मचारियों को मूनलाइटिंग के कारण निकाल दिया है। विप्रो ने बताया था कि आईटी सेवा कंपनी के पास ऐसे कर्मचारियों के लिए कोई जगह नहीं है। विप्रो काम करने में सहूलियत को पसंद करता है।
क्या है मूनलाइटिंग
अगर कोई कर्मचारी अपने दिन के जॉब के बाद किसी अन्य प्रोजेक्ट पर फ्रिलांस तौर पर काम करता है तो उसे मूनलाइटिंग कहा जाता है। सिधे शब्दो में कहें तो मूनलाइटिंग का मतलब है नौकरी के बाद अतिरिक्त काम करके पैसा कमाना। अक्सर लोग दिन में नौकरी करते हैं ऐसे में केवल रात को उनके पास अन्य काम के लिए समय बचता है, इसिलिए इस एक्स्ट्रा वर्क करके कमाने को मूनलाइटिंग कहते हैं।
कंपनियों को नहीं आ रहा है पसंद
ऋषद प्रेमजी द्वारा इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद यह मुद्दा अन्य कंपनियों में भी उठने लगा है। श्री प्रेमजी ने इस मुद्दे को उजागर करने के लिए ट्विटर का सहारा लिया था, उन्होने ने लिखा था "तकनीक उद्योग में मूनलाइटिंग करने वाले लोगों के बारे में बहुत सारी बकवास है। यह कंपनी के साथ एक धोखा है, जो की बहुत सादा और सरल है।" एचसीएल टेक्नोलॉजीज ने भी इस मुद्दे पर कहा है कि कंपनी दोहरे रोजगार को बढ़ावा नहीं देती है। भारत में खासकर आईटी सेक्टर के यूवा मूनलाइटिंग ज्यादा करते हैं।


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