नई दिल्ली, अगस्त 26। अगर आपका बच्चा हाल ही में विदेश पढ़ने गया है या आपका कोई रिश्तेदार विदेश रहता है जिसे आप पैसा भेजना चाहते हैं तो आपको विदेश पैसे भेजने के कानून को जान लेना चाहिए। नियम कानूनों को जान लेना आपको मुश्किल में नहीं फसने देगा। विदेश पैसे भेजने के लिए आरबीआई ने बहुत सख्त कानून बनाएं हैं। आरबीआई के इस नियम को लिब्रलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) कहा जाता है। यह कानून फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट, 1999 के अंदर आता है।
2.5 लाख डॉलर तक भेजने की है अनुमति
कोई भारतीय एक फाइनेंशियल ईयर में करेंट अकाउंट या कैपिटल अकाउंट ट्रांजेक्शन के माध्यम से विदेश 2.5 लाख डॉलर तक भेज सकता है। कोई भी भारतीय व्यक्ति कितनी बार विदेश पैसे भेज सकता है, इस बात की कोई तय सीमा नहीं है। हालांकि, एनआरआई के लिए नियम अलग है। कोई भी अनिवासी भारतीय आरओ अकाउंट के माध्यम से एक वित्त वर्ष में 10 लाख डॉलर तक की राशि विदेश भेज सकता है। वहीं बात अगर एनआरई और एफसीएनआर अकाउंट्स की करें तो इसमें पैसे भेजने की कोई सीमा नहीं है।
किन कामों के लिए विदेश पैसा भेज सकते हैं
कोई भी भारतीय व्यक्ति निजी विदेश यात्रा (नेपाल, भूटान के अलावा), गिफ्ट या डोनेशन, करीबी रिश्तेदार के मेंटेनेंस के लिए पैसे, बिजनेस ट्रेवेल, कॉन्फ्रेंस या स्पेशियलाइज्ड ट्रेनिंग में हिस्सा लेने, एंप्लॉयमेंट, एमिग्रेशन, मेडिकल एक्सपेंसेज या चेकअप और विदेश में पढ़ाई आदि के लिए पैसा भेज सकता है।
कितना लगता है टैक्स
नियमों में बदलाव के बाद 1 अक्टूबर, 2020 से विदेश पैसे भेजने पर टैक्स कलेक्शन सोर्स लगता है। नियम के अनुसार अगर कोई व्यक्ति 7 लाख रुपये से ज्यादा की रकम विदेश भेजता है तो मुलधन राशि पर 5 फीसदी की टीसीएस कटेगा। अगर कोई भारतीय विदेश में पढ़ाई के लिए लोन चुका रहा है तो राशि 7 लाख रुपये से ज्यादा होने पर 0.5 फीसदी का टीसीएस लागेगा। अगर पैसे भेजते समय पैन कार्ड की जानकारी साझा करना भूल जाते हैं तो कैटेगरी के अनुसार 10 फीसदी से 5 फीसदी तक टैक्स देना पड़ेगा। एनआरआई को सरचार्ज, एजुकेशन और हेल्थ सेस भी देना पड़ता है।
पैसे भेजने का खर्च
विदेश पैसे भेजने पर खर्च पैसे भेजने के ऑफलाइन या ऑनलाइन माधयमों पर निर्भर करता है। विदेश पैसे ट्रांसफर करने में ट्रांसफर फीस, इंटरमीडियरी या कॉरेस्पॉन्डेंट बैंक फीस, करेंसी स्प्रेड फीस, कूरियर चार्ज और जीएसटी आदि लगते हैं। ऑनलाइन पैसो के ट्रांसफर में बैंक और ट्रांसफर एजेंट्स दोनों फ्लैट फीस लेते हैं। इन सबके बाद भेजे जाने वाले अमाउंट का कुछ फीसदी और टैक्स लगता है।


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