नई दिल्ली, सितंबर 06। भारतीय रिजर्व बैंक की महत्वपूर्ण भूमिकाओं में से एक है करेंसी का वितरण करना। चलिए आज हम आपको बताते हैं कि देश का केंद्रीय बैंक करेंसी मुद्रित करने के बाद किस तरह से लोगों को करेंसी बांटता है, और इसकी क्या प्रक्रिया है। आरबीआई की भूमिका देश की इकोनॉमि को स्थिर रखने में बड़ी है। देश में अर्थव्यवस्था तभी स्थिर बनी रहेगी जब बैंकों और लोगों के बीच कैश की समरसता बनी रहेगी। आरबीआई अर्थव्यवस्था से जुड़ी तमाम पहलुओं को मॉनिटर करता रहता है।
19 कार्यालयों से होता है काम
भारतीय रिज़र्व बैंक वर्तमान में अहमदाबाद, बेंगलुरु, बेलापुर, भोपाल, भुवनेश्वर, चंडीगढ़, चेन्नई, गुवाहाटी, हैदराबाद, जयपुर, जम्मू, कानपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, न्यू दिल्ली, पटना, में स्थित अपने 19 निर्गम कार्यालयों के माध्यम से मुद्रा संचालन का प्रबंधन करता है। तिरुवनंतपुरम और कोच्चि कार्यालय में रिजर्व बैंक ने मुद्रा तिजोरी बनाई है।
बैंको की होती है बड़ी भूमिका
रिजर्व बैंक के कार्यालयों के अलावा शेड्यूल्ड बैंकों द्वारा अनुरक्षित और प्रबंधित करेंसी चेस्ट का एक विस्तृत नेटवर्क मुद्रा प्रबंधन को बनाए रखने का हिस्सा है। निर्गम कार्यालयों को मुद्रा प्रिंटिंग प्रेसों से नए बैंक नोट प्राप्त होते हैं जिसके बाद अधिकारी मुद्रा तिजोरियों को नए बैंक नोट भेजते हैं। प्रेस द्वारा मुद्रा तिजोरियों से भी डायरेक्ट प्रत्यक्ष रिमिट किया जाता है।
कैसे होता है सिक्कों का संचालन
हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई और नई दिल्ली (मिंट लिंक्ड ऑफिस) में स्थित रिज़र्व बैंक के कार्यालय मिंट से सिक्के प्राप्त करते हैं। इसके बाद ये कार्यालय सिक्कों को रिजर्व बैंक के अन्य कार्यालयों में भेजते हैं जो बदले में उन्हें करेंसी चेस्ट और छोटे सिक्का डिपो को भेजते हैं। बैंकनोट और रुपये के सिक्के करेंसी चेस्ट में और छोटे सिक्के छोटे सिक्का डिपो में रखे जाते हैं। बैंक शाखाएं जनता के बीच वितरण के लिए करेंसी चेस्ट और छोटे सिक्का डिपो से बैंक नोट और सिक्के प्राप्त करती हैं।


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