नई दिल्ली, सितंबर 30। प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल बिजली को पैदा करने, ऑटोमोबाइल चलाने के लिए सीएनजी में परिवर्तित किया जाता हैं, इसकी कीमतों में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई हैं और ये रिकॉर्ड स्तर में पहुंच गई हैं। इस वजह से सीएनजी की कीमतों में और पीएनजी की कीमतों में जल्द ही बढ़ोतरी होने की संभावना हैं। तेल मंत्रालय के पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) के मुताबिक, पुराने क्षेत्रों से उत्पन्न गैस के लिए भुगतान की दर, जो सभी उत्पादित गैस का करीब 2 तिहाई हैं। जो देश में उत्पादित होती हैं। कि दर और मौजूदा 6.1 अमेरिकी डॉलर से बढ़ा दिया हैं और इसको बढ़ा कर 8.57 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट इसको कर दिया गया हैं।
गैस की प्राइस 9.92 से 12.6 अमेरिकी डॉलर
इस आदेश के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और उसके सहयोगी बीपी पीएलसी द्वारा संचालित केजी बेसिन में डीपसी डी6 ब्लॉक जैसे बेहद मुश्किल और नए क्षेत्रों से गैस की प्राइस 12.6 अमेरिकी डॉलर प्रति एमएमबीटीयू कर दी गई है। इसकी कीमत पहले 9.92 अमेरिकी डॉलर थी।
दरों में वृद्धि ये तीसरी बार होगी
अप्रैल 2019 के वक्त से दरों में वृद्धि ये तीसरी बार होगी और बेंचमार्क विदेशी कीमतों में मजबूती की वजह से आई हैं। गैस उर्वरक तो बनाती हैं साथ ही बिजली पैदा करने के लिए एक इनपुट हैं इसे सीएनजी में परिवर्तित किया जाता हैं। घरों में इसको पाइप के माध्यम से खाना बनाने के लिए उपयोग किया जाता हैं। इसकी कीमतों में तेजी की वजह से अब सीएनजी की कीमतों और पीएनजी की कीमतों में तेजी आने की संभावना हैं। जो 70 प्रतिशत से अधिक पिछले एक वर्ष में बढ़ी हैं।
सरकार हर 6 महीने में गैस की कीमतें तय करती हैं
हर 6 महीने में सरकार की तरफ से गैस की कीमतें तय की जाती हैं। सरकार 1 अप्रैल और 1 अक्टूबर को गैस को कीमत तय करती हैं। जो कि कनाडा, अमेरिका और रूस जैसे गैस अधिशेष देशों में 1 वर्षो में एक चौथाई के समय में प्रचिलित दरों के आधार पर तय होती हैं। इसी वजह से 1 अक्टूबर से 31 मार्च की प्राइज जुलाई 2021 से जून 2022 तक की औसत कीमत पर आधारित है।


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