नई दिल्ली, जुलाई 10। देश के साथ दुनियाभर के कई हिस्से महंगाई की मार से जूझ रहे हैं। इसके चलते न खाने पीने की चीजें महंगी हुई हैं, बल्कि इलाज से लेकर कई अन्य जरूरी काम भी महंगे हो गए हैं। इसके कारणों में रूस यूक्रेन विवाद से लेकर सप्लाई लाइन की दिक्कतों को बतया जा रहा है। लेकिन इसी बीच एक बड़ी खबर आरबीआई की तरफ से आई है। आरबीआई ने इस बात का अनुमान बताया है कि इस महंगाई से कब तक कमी आने वाली है।
आइये जानते हैं कि क्या वह समय, जब कम होगी महंगाई
आरबीआइ गवर्नर डा. शक्तिकांत दास ने अनुमान जताया है कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में (अक्टूबर 2022 से मार्च, 2023) के दौरान महंगाई काफी हद तक काबू में आ जाएगी। उन्होंने भरोसा दिया कि आरबीआई धीरे-धीरे ही ब्याज दरों में वृद्धि करेगा, ताकि आर्थिक विकास की रफ्तार पर नकारात्मक असर न पड़े। शक्तिकांत दास ने बताया कि कोरोना महामारी के बाद से आरबीआई का मुख्य मकसद अर्थव्यवस्था को सुरक्षित करना और वित्तीय स्थायित्व को लगातार मजबूत करना ही रहा है।
काफी तेजी से बढ़ी है महंगाई
वैश्वीकरण की वजह से महंगाई की चुनौती बहुत बढ़ गई है। दुनिया में ज्यादा कारोबार होने के कारण वैश्विक प्रभावों का असर अब घरेलू बाजार पर ज्यादा और तेजी से पड़ता है। कई बार यह प्रभाव लंबे समय तक भी बना रहा है। शक्तिकांत दास के अनुसार जिन देशों ने 3 से 5 प्रतिशत का महंगाई लक्ष्य तय किया था, उन देशों में से दो तिहाई देशों में इस वक्त महंगाई की दर 7 प्रतिशत से ऊपर चल रही है। हो गई है।
वैश्विक कारण ही महंगाई के लिए जिम्मेदार
नई दिल्ली में कौटिल्य आर्थिक संवाद में आरबीआइ गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौजूदा महंगाई संकट के लिए मौटे तौर पर वैश्विक हालात को ही जिम्मेदार माना है। शक्तिकांत दास ने कहा है कि 2022 की शुरुआत में उम्मीद थी कि वर्ष 2022-23 की तीसरी तिमाही तक महंगाई की दर 4 प्रतिशत के करीब आ जाएगी, लेकिन यूक्रेन-रूस युद्ध ने हालात को पूरी तरह से बदल दिया है। कच्चे तेल व दूसरे जिंसों की कीमतों में वृद्धि और खाद्यान्न संकट से महंगाई को काफी बल मिला है। युद्ध और प्रतिबंधों से सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस वजह से मौद्रिक नीति तय करने वाली समिति को भी महंगाई दर के लक्ष्य को बढ़ा कर 6.7 प्रतिशत करना पड़ा है।


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