महंगाई ने आम आदमी का बजट बिलकुल हिला कर रख दिया है। देशभर में पहले से ही महंगाई चरम पर है। फिलहाल का आलम तो ये है कि हर किसी चीज के दाम बढ़ते जा रहे हैं।
नई दिल्ली, मार्च 7। महंगाई ने आम आदमी का बजट बिलकुल हिला कर रख दिया है। देशभर में पहले से ही महंगाई चरम पर है। फिलहाल का आलम तो ये है कि हर किसी चीज के दाम बढ़ते जा रहे हैं। भारत में दूध के बाद अब पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ रसाई गैस की कीमतों में इजाफा हुआ है। एक तो पहले से ही जनता खाने-पीने के सामान के दाम बढ़ने से परेशान थी। अब आय दिन पेट्रोल-डीजल के साथ सीएनजी और पीएनजी के दामों में आई तेजी से आम आदमी के जेब पर और भारी बोझ पड़ने वाली है।
दूसरी ओर बीते कल बुधवार को एक सरकारी अधिकारी का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में निरंतर वृद्धि का अर्थव्यवस्था के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने आगे कहा कि 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर की कीमतों में लंबे समय तक बढ़ोतरी से मुद्रास्फीति में और बढ़ोतरी होगी, जिससे सेंट्रल बैंक को ब्याज दरों में वृद्धि करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

इस बात से भी अवगत कराया कि अगर कच्चे तेल की कीमतें कम से कम एक महीने के लिए 110-120 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहती हैं तो इससे मुद्रास्फीति अधिक हो जाएगी जो अर्थव्यवस्था के विकास में बाधा उत्पन्न करेगी। चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कोयले के आयात पर निर्भर है, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण बिजली कंपनियां टैरिफ में वृद्धि करेंगी।
इस दौरान सरकारी अधिकारी का ये भी कहना है कि वैश्विक स्तर पर कोयले की कीमत में साल-दर-साल 196% की वृद्धि हुई है। ऊर्जा की लागत से अधिकांश वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि होगी। फिक्स्ड टैरिफ के मामले में, बिजली उत्पादन कंपनियां अपनी लागत वसूल नहीं कर पाएंगी और उन्हें भारी नुकसान हो सकता है, जिसके परिणामस्वरूप सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए खराब ऋण परिदृश्य होगा। इसके अलावा, सीमेंट, स्टील और कागज उद्योग भी गहरे नुकसान में चल सकते हैं क्योंकि उनके पास ऐसे प्लांट हैं जो कोयले पर चलते हैं।
यह भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि भारतीय रिजर्व बैंक पहले से ही मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों में वृद्धि के लिए भारी दबाव में है। अधिकारी के अनुसार, ब्याज में वृद्धि देश की विकास दर को नकारात्मक रूप से प्रभावित करेगी। इसके साथ ही मुद्रास्फीति विदेशी निवेशकों को भारत में निवेश करने के लिए हतोत्साहित करेगी और रुपये का अवमूल्यन होगा। महंगाई बढ़ने से चालू खाता घाटा और राजकोषीय घाटा भी बढ़ेगा। सरकार की उधार लेने की लागत भी बढ़ेगी जिसका ब्याज दरों पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा।
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