Inflation: दालों की कीमतों में निरंतर इजाफा देखा जा रहा है। इस वर्ष भी दाल की कीमतों में 10 प्रतिशत का इजाफा हुआ है और आगे भी इसमें बढ़ने की संभावना है। सरकार के लगातार प्रयास के बाद भी दाल की कीमतों में इजाफा रुकने का नाम नहीं ले रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वर्ष 2012 के आधार वर्ष के से तुअर दाल का मूल्य सूचकांक मूल्य करीब 88 फीसदी बढ़ गया है। जून के महीने में उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति बढ़कर 4.81 प्रतिशत हो जाने से दालें सबसे महंगी खाद्य वस्तु के रूप में टमाटर और अन्य सब्जियों से आगे निकल सकती हैं।

कम उत्पादन और देश के कुछ क्षेत्रों में मानसून में देरी के वजह से कई भारतीय शहरों में टमाटर की कीमतें 100 रु प्रति किलो की लिमिट को पर कर गई हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक गृहिणी का कहना है कि सब्जियों की कीमतें पहले से ही बढ़ रही हैं और दालों की कीमतों में अगर इजाफा होता है तो फिर इससे घरेलू बजट में असर पड़ेगा। गृहिणी का कहना है कि इसे हमें अन्य दूसरे सस्ते ऑप्शन का उपयोग करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जब मानसून का सीजन आता है तब सब्जियों की ऊंची कीमतें सामान्य हो जाती हैं। हालांकि, इस वर्ष दालों को कीमतों में करीब 10 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के शोध के मुताबिक, पिछले 5 महीनों में दाल मुद्रास्फीति करीब दोगुनी हो गई है।
दालों में मंहगाई वर्तमान समय में काफी परेशान करने वाले वाली है क्योंकि चावल और गेहूं की बढ़ती लागत की वजह से यह और भी खराब हो जाती है, जिससे भारतीय थाली आम तौर पर महंगा भोजन बन जाती है। चावल की कीमत 10 फीसदी बढ़ गई है, जबकि गेहूं की कीमत 12 फीसदी बढ़ गई है।
थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) के मुताबिक, मई में सीपीआई 6.6 प्रतिशत और दालों की मुद्रास्फीति 5.8 प्रतिशत थी। सीपीआई ने जून में दाल मुद्रास्फीति में 10.58 प्रतिशत की वृद्धि दिखाई।


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