IndusInd Bank Officials under Investigation: भारत के बाजार नियामक (SEBI) ने इंडसइंड बैंक के छह अधिकारियों के खिलाफ इनसाइडर ट्रेडिंग की जांच शुरू की है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, दो सूत्रों ने जानकारी दी है कि इस जांच से ये भी लगाना है कि क्या इन अधिकारियों ने बैंक में हुई अकाउंटिंग गड़बड़ियों की जानकारी पब्लिक होने से पहले ही स्टॉक ऑप्शंस बेच दिए थे। अगर ऐसा पाया जाता है, तो यह इनसाइडर ट्रेडिंग के तहत एक नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। SEBI फिलहाल इस मामले की गहराई से जांच कर रहा है।

सेबी छह अधिकारियों की शेयर लेनदेन की कर रहा जांच
सेबी इन छह अधिकारियों द्वारा किए गए शेयर लेन-देन के समय की गहन जांच कर रहा है। SEBI यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या इन अधिकारियों ने बैंक के इंटरनल नियमों और इनसाइडर ट्रेडिंग से जुड़े नियमों का उल्लंघन किया है। यह जांच इसलिए अहम है क्योंकि ये अधिकारी भारत के पांचवें सबसे बड़े निजी बैंक इंडसइंड बैंक से जुड़े हैं।
ये जांच अभी प्रीलमिरी स्टेज में है और अब तक ना तो इंडसइंड बैंक को और न ही संबंधित आधिकारियों को कोई शो कॉज नोटिस भेजा गया है। शो कॉज नोटिस (कारण बताओ नोटिस) तब भेजा जाता है जब रेगुलेटर को लगता है कि नियमों का उल्लंघन हुआ है और जवाब मांगना जरूरी है। सूत्रों के अनुसार, अभी ऐसी कोई आधिकारिक कार्रवाई नहीं हुई है।
इनसाइडर ट्रेडिंग के गंभीर आरोप
मनीकंट्रोल के अनुसार, इंडसइंड बैंक और SEBI ने इस मामले पर भेजे गए ईमेल सवालों का कोई जवाब नहीं दिया है। इससे पहले रायटर्स ने रिपोर्ट किया था कि ऑडिट और सलाहकार फर्म ग्रांट थॉर्नटन की जांच में यह सामने आया कि बैंक के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने बैंक में अकाउंटिंग गड़बड़ियों की जानकारी होने के बावजूद, और उनके सार्वजनिक होने से पहले ही, बैंक के शेयरों में ट्रेडिंग की थी। यह खुलासा इनसाइडर ट्रेडिंग के गंभीर आरोपों की ओर इशारा करता है, और इसी के आधार पर SEBI ने जांच शुरू की है।
रिपोर्ट में दी गई ये जानकारी
सूत्रों ने ये भी जानकारी दी है कि SEBI ने बैंक से फॉरेंसिक रिपोर्ट की एक कॉपी मांगी है। बैंक ने मार्च में यह खुलासा किया था कि आंतरिक डेरिवेटिव ट्रेड्स के गलत लेखांकन के कारण उसके 60.8 बिलियन डॉलर के बैलेंस शीट में 230 मिलियन डॉलर का घाटा हुआ है। यह मामले की गंभीरता को दर्शाता है और इसी वजह से सेबी ने जांच तेज कर दी है।
बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुमंत कथपलिया और डिप्टी अरुण खुराना पिछले महीने अपने पद से इस्तीफा दिया है। एक सूत्र ने बताया कि अगर कर्मचारी ऐसे समय पर स्टॉक ऑप्शंस का फायदा उठाते हैं जब उनके पास अनपब्लिश्ड प्राइस सेंसिटिव जानकारी होती है, तो यह नियामक नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है। यानी, ये ऐसी ट्रेडिंग इनसाइडर ट्रेडिंग के अंतर्गत आती है और इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है।
भारत में इनसाइडर ट्रेडिंग के खिलाफ क्रिमिनल और सिविल दोनों तरह की कार्रवाई हो सकती है, लेकिन अब तक कोई भी क्रिमिनल मामला साबित नहीं हुआ है। SEBI का आदेश आमतौर पर जुर्माना लगाने और कुछ निर्देश देने तक सीमित रहता है, जैसे सेबी किसी भी व्यक्ति पर एक निश्चित समय के लिए बाजार में ट्रेडिंग करने पर रोक लगा सकता है।
सूत्रों ने बताया कि बैंक के कोड ऑफ कंडक्ट के तहत, इस तरह के उल्लंघन पर बोनस और कर्मचारी स्टॉक ऑप्शंस को वापस लिया जा सकता है। इसके अलावा, बैंक से यह भी पूछा गया है कि अकाउंटिंग गड़बड़ियों को सार्वजनिक करने में देरी क्यों हुई, जबकि प्रबंधन को इसके बारे में सितंबर 2024 या उससे पहले ही जानकारी हो चुकी थी।


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