भारत का टेलीकॉम सेक्टर एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। अब तक जहां कंपनियों का मुख्य फोकस नेटवर्क विस्तार और 5G रोलआउट पर था, वहीं आने वाले समय में तस्वीर बदलती दिख रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की बढ़ती मांग को देखते हुए देश की बड़ी टेलीकॉम कंपनियां अब AI डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश की तैयारी कर रही हैं। आने वाले दो से तीन सालों में इस सेक्टर में एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश होने की उम्मीद जताई जा रही है।

क्यों बदला टेलीकॉम कंपनियों का फोकस
इकोनॉमिक टाइम्स इंग्लिश की एक रिपोर्ट के अनुसार, बीते कुछ सालों में 5G नेटवर्क पर काफी बड़ा निवेश हो चुका है। जियो और भारती एयरटेल जैसी कंपनियां देश के ज्यादातर हिस्सों में 5G सर्विस शुरू कर चुकी हैं। अब नेटवर्क विस्तार का बड़ा चरण लगभग पूरा हो गया है। ऐसे में कंपनियां नए रेवेन्यू सोर्स तलाश रही हैं। AI, क्लाउड और डेटा सेंटर ऐसे क्षेत्र हैं, जहां आने वाले समय में जबरदस्त ग्रोथ की संभावना है।
AI की बढ़ती मांग ने खोले नए रास्ते
आज AI का इस्तेमाल सिर्फ टेक कंपनियों तक सीमित नहीं है। बैंकिंग, हेल्थ, एजुकेशन, मैन्युफैक्चरिंग और ई-कॉमर्स जैसे सेक्टर भी तेजी से AI अपना रहे हैं। इन सभी को मजबूत डेटा सेंटर और हाई कंप्यूटिंग पावर की जरूरत होती है। इसी जरूरत को देखते हुए टेलीकॉम कंपनियां AI-सेंट्रिक डेटा सेंटर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
निवेश से बदलेगा कमाई का मॉडल
जानकारों का मानना है कि इस बदलाव से टेलीकॉम कंपनियों की कमाई की दिशा भी बदल सकती है। आने वाले वित्तीय वर्षों में कंपनियों के कुल बजट का बड़ा हिस्सा AI डेटा सेंटर, क्लाउड सर्विस और एज इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च हो सकता है। इससे कंपनियों को सिर्फ मोबाइल यूजर्स से ही नहीं बल्कि एंटरप्राइज और ग्लोबल क्लाइंट्स से भी कमाई का मौका मिलेगा।
बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू
कुछ कंपनियां पहले ही बड़े डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स की घोषणा कर चुकी हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में हाई कैपेसिटी डेटा सेंटर बनाए जा रहे हैं, जहां AI वर्कलोड को संभाला जा सके। इन सेंटरों में एडवांस सर्वर, स्टोरेज और एनर्जी एफिशिएंट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि लागत भी कंट्रोल में रहे।
सरकार और डिजिटल इंडिया को मिलेगा फायदा
AI डेटा सेंटर में निवेश से न सिर्फ कंपनियों को फायदा होगा, बल्कि देश की डिजिटल इकोनॉमी भी मजबूत होगी। इससे लोकल डेटा स्टोरेज बढ़ेगा, डिजिटल सर्विसें तेज होंगी और नए रोजगार के मौके भी पैदा होंगे। सरकार के डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया जैसे अभियानों को भी इससे सहारा मिलेगा।
आगे क्या है तस्वीर
टेलीकॉम सेक्टर अब सिर्फ कॉल और डेटा तक सीमित नहीं रहना चाहता। AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में कदम रखकर कंपनियां भविष्य की तैयारी कर रही हैं। आने वाले सालों में यह निवेश भारत को AI और डेटा सेंटर हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।
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