आर्थिक सुस्ती से उबर रही भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कल यानि बुधवार को एक और राहतभरी खबर आई है। फरवरी में देश के सेवा क्षेत्र की रफ्तार सात साल के उच्च स्तर पर रही।
नई दिल्ली: आर्थिक सुस्ती से उबर रही भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कल यानि बुधवार को एक और राहतभरी खबर आई है। फरवरी में देश के सेवा क्षेत्र की रफ्तार सात साल के उच्च स्तर पर रही। सेवा क्षेत्र में यह वृद्धि विदेशी मांग में तेजी वापस लौटने और बिजनस कॉन्फिडेंस में मजबूती का परिणाम है। जी हां सेवा पर्चेजिंग मैनेजर इंडेक्स (पीएमआई) सर्वेक्षण के मुताबिक फरवरी में सेवा क्षेत्र में सात साल से अधिक की सर्वाधिक तेजी दर्ज की गई। सर्वेक्षण के मुताबिक नए ठेके और निर्यात की मांग में बढ़ोतरी और कारोबारी मनोबल सुधरने से सेवा क्षेत्र में भारी तेजी दर्ज की गई। आईएचएस मार्किट इंडिया सर्विसेज बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स जनवरी के 55.5 से बढ़कर फरवरी में 57.5 पर पहुंच गया। जनवरी 2013 के बाद सेवा क्षेत्र के उत्पादन में यह सर्वाधिक तेजी है।

सितंबर में सेवा क्षेत्र में 19 महीने की सबसे बड़ी गिरावट
मालूम हो कि सेवा क्षेत्र की कंपनियों के नए ठेकों में फरवरी में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई। यह सात साल से अधिक अवधि में दूसरी सर्वाधिक तेजी है। सर्वेक्षण के मुताबिक विदेश से मिलने वाले ठेकों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं अंतरराष्ट्रीय मांग में बहुत अधिक तेजी तो नहीं आई। लेकिन इसकी रफ्तार लंबी अवधि के औसत से ज्यादा है। आईएचएस मार्किट की प्रधान अर्थशास्त्री के मुताबिक पिछले साल सितंबर के बाद से हर महीने सेवा क्षेत्र की रफ्तार में तेजी आई है। सितंबर में सेवा क्षेत्र में 19 महीने की सबसे बड़ी गिरावट दिखी थी।
उत्पादन बढ़ने से निजी क्षेत्र में आठ साल की सबसे बड़ी तेजी
सेवा और मैन्यूफैक्चरिंग दोनों ही सेक्टरों की गतिविधियों को दर्शाने वाला कंपोजिट पीएमआई आउटपुट इंडेक्स जनवरी के 56.3 से उछलकर फरवरी में 57.6 पर पहुंच गया। यह लंबी अवधि की औसत 54.6 की तुलना में अधिक है। वहीं उन्होंने कहा कि सेवा क्षेत्र में घरेलू और विदेशी दोनों ही बाजारों से मांग में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। फरवरी के आंकड़ों के मुताबिक सेवा और मैन्यूफैक्चरिंग दोनों ही क्षेत्रों का उत्पादन बढ़ने से निजी क्षेत्र में आठ साल की सबसे बड़ी तेजी दर्ज की गई।
जबकि आलोच्य महीने में रोजगार सृजन की रफ्तार हालांकि तीन महीने के निचले स्तर पर आ गई। इसके अलावा फूड, लेबर, मटीरियल और तेल की कीमत में बढ़ोतरी की खबरों के बीच सेवा क्षेत्र की कंपनियों की इनपुट लागत में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
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