12 मई को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 95.75 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर लुढ़क गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिका-ईरान के बीच नाजुक युद्धविराम को लेकर बढ़ती अनिश्चितता ने रुपये की कमर तोड़ दी है। साल 2026 में अब तक रुपया 6.02 फीसदी टूट चुका है, जिससे यह इस साल एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी बन गया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच रुपये पर दबाव बना हुआ है। इस उथल-पुथल के बीच, अप्रैल के महंगाई के आंकड़ों ने मिले-जुले संकेत दिए हैं, जिससे 13 मई को ट्रेडर्स के लिए बाजार में उतार-चढ़ाव की स्थिति बन सकती है।
रिकॉर्ड निचले स्तर पर रुपया: गिरने की क्या है वजह
ब्रेंट क्रूड के 105 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने से भारत जैसी तेल आयातक अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव काफी बढ़ गया है। इससे चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ने की चिंता गहरा गई है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने डॉलर की मांग बढ़ा दी है, जिससे रुपया पस्त है। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के जरिए 95.50 के स्तर पर हस्तक्षेप किया था, लेकिन बाद में हाथ खींच लिए, जिससे करेंसी और कमजोर हो गई।

अप्रैल की खुदरा महंगाई: उम्मीद से कम, लेकिन जोखिम बरकरार
कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) पर आधारित भारत की सालाना खुदरा महंगाई दर अप्रैल 2026 में बढ़कर 3.48 फीसदी हो गई। मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल के कारण यह दिसंबर के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। हालांकि, यह आंकड़ा अभी भी आरबीआई के 4 फीसदी के लक्ष्य से नीचे है, लेकिन मार्च के 3.40 फीसदी के मुकाबले इसमें बढ़ोतरी कीमतों के दबाव को दर्शाती है। रॉयटर्स के पोल में खुदरा महंगाई 3.8 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया था, इसलिए वास्तविक आंकड़ा बाजार के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है।
खाने-पीने की चीजों के दाम और महंगाई का अंतर
खाद्य महंगाई दर अप्रैल में बढ़कर 4.20 फीसदी हो गई, जो मार्च में 3.87 फीसदी थी। ग्रामीण इलाकों में यह 4.26 फीसदी रही, जबकि शहरी इलाकों में 4.10 फीसदी दर्ज की गई। सब्जियों के बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया; टमाटर की महंगाई दर 35.28 फीसदी और फूलगोभी की 25.58 फीसदी रही, जिससे आम आदमी की थाली महंगी हो गई। हालांकि, आलू की महंगाई दर मार्च के माइनस 19.03 फीसदी से गिरकर अप्रैल में माइनस 23.69 फीसदी पर आ गई, वहीं प्याज की कीमतों में भी माइनस 17.67 फीसदी की राहत मिली।
SBI रिसर्च की चेतावनी: महंगाई का छिपा हुआ खतरा
एसबीआई रिसर्च के मुताबिक, वैश्विक ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी, सप्लाई चेन में बाधा और आयातित वस्तुओं की लागत के कारण आने वाले महीनों में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। 'इकोव्रैप' रिपोर्ट में कहा गया है कि विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव के बावजूद, अब तक 'इंपोर्टेड इन्फ्लेशन' (आयातित महंगाई) तेजी से नहीं बढ़ी है क्योंकि भारत में ईंधन की खुदरा कीमतें काफी हद तक स्थिर हैं। रिपोर्ट में आगाह किया गया है: "वैश्विक तेल की ऊंची कीमतों का पूरा असर अभी तक भारतीय खुदरा महंगाई पर नहीं दिखा है।"
एक्सपोर्टर्स बनाम तेल-संवेदनशील सेक्टर: 13 मई के लिए रणनीति
टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो और एचसीएल टेक जैसे आईटी एक्सपोर्टर्स के साथ-साथ सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज और सिप्ला जैसी फार्मा कंपनियां 2026 में रुपये की गिरावट से सबसे ज्यादा फायदे में हैं। इनकी कमाई डॉलर में होती है लेकिन रिपोर्ट रुपये में की जाती है, इसलिए रुपये की हर कमजोरी इनके मार्जिन को बढ़ा देती है। 2026 में अब तक फार्मा शेयर निवेशकों के लिए सुरक्षित दांव साबित हुए हैं। निफ्टी फार्मा इंडेक्स में इस साल केवल 3 फीसदी की गिरावट आई है, जबकि बेंचमार्क इंडेक्स 12 फीसदी तक टूटा है। एनालिस्ट्स का कहना है कि रुपये की कमजोरी और बेहतर कमाई की उम्मीद ने इस सेक्टर को मजबूती दी है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने एनर्जी सेक्टर को दो हिस्सों में बांट दिया है। तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर दबाव दिखा, जबकि तेल उत्पादक कंपनियों (Upstream) को फायदा हुआ। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) 5.03 फीसदी, हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) 5.31 फीसदी और भारत पेट्रोलियम (BPCL) 6.09 फीसदी तक गिर गए। इसके उलट, ओएनजीसी (ONGC) में 4.73 फीसदी और ऑयल इंडिया में 4.43 फीसदी की तेजी दर्ज की गई।
| सेक्टर | 13 मई के लिए नजरिया | प्रमुख शेयर | बड़ा जोखिम |
|---|---|---|---|
| IT एक्सपोर्टर्स | गिरावट पर खरीदें | TCS, Infosys, HCL Tech | AI प्राइसिंग का दबाव |
| फार्मा एक्सपोर्टर्स | खरीदें / होल्ड करें | Sun Pharma, Dr Reddy's, Cipla | अमेरिकी टैरिफ अनिश्चितता |
| अपस्ट्रीम ऑयल (ONGC, Oil India) | चुनिंदा खरीदारी | ONGC, Oil India | भू-राजनीतिक बदलाव |
| OMCs (IOC, BPCL, HPCL) | बचें / बेचें | IOC, BPCL, HPCL | मार्जिन में कमी |
| एविएशन और पेंट्स | बचें | IndiGo, Asian Paints | लागत में भारी बढ़ोतरी |
मॉनेटरी पॉलिसी और मार्केट आउटलुक
एसबीआई म्यूचुअल फंड के सीआईओ (फिक्स्ड इनकम) राजीव राधाकृष्णन ने चेतावनी दी है कि अगर महंगाई की उम्मीदें स्थिर बनी रहती हैं, तो सप्लाई शॉक और कमजोर रुपया आरबीआई को अपनी मॉनेटरी पॉलिसी बदलने पर मजबूर कर सकता है। एनालिस्ट्स को उम्मीद है कि जब तक उतार-चढ़ाव बना रहेगा, तब तक बैंकिंग, आईटी और तेल-संवेदनशील सेक्टर जैसे एविएशन और पेंट्स का प्रदर्शन कमजोर रह सकता है, जबकि फार्मा और हेल्थकेयर को सुरक्षित विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
साल 2026 में अब तक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 20 अरब डॉलर से ज्यादा की रिकॉर्ड बिकवाली की है, जिसमें अकेले अप्रैल में 7.5 अरब डॉलर की निकासी हुई। आरबीआई उतार-चढ़ाव को कम करने के लिए दखल दे रहा है, लेकिन वह किसी खास स्तर को बचाने की कोशिश नहीं कर रहा है। एक एनालिस्ट ने कहा, "विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल गिरावट को धीमा करने के लिए किया जा रहा है, उसे पलटने के लिए नहीं।" जब तक ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर के ऊपर है और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी है, तब तक डॉलर के मुकाबले रुपया और कमजोर हो सकता है। 13 मई को ट्रेडर्स के लिए रास्ता साफ है: एक्सपोर्ट से कमाने वाली कंपनियां सबसे सुरक्षित ठिकाना हैं, जबकि तेल आयात पर निर्भर सेक्टर तब तक दबाव में रहेंगे जब तक कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक हालात स्थिर नहीं हो जाते।


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