भारतीय रेलवे लगातार विभिन्न सर्विसेज शुरू करके पैसेंजर्स की सुविधा बढ़ा रहा है. इस कड़ी में एक बड़ा अपडेट आया है. रेलवे अगले 3 सालों में 15,000 नए स्लीपर कोच लगाएगा. इसके अलावा ट्रैवल आराम और पहुंच में सुधार के लिए हाई डिमांड वाले रूट्स पर नई ट्रेनें शुरू की जाएंगी. पैसेंजर ट्रेनों पर सरकार के फोकस बढ़ा है. नए स्लीपर कोचों के लिए टेंडर की प्रक्रिया भी जल्द ही शुरू होगी. टेंडर्स चरणों में जारी की जाएंगी, जिनमें प्रत्येक टेंडर में 500 से 1,000 कोच तक का साइज होगा.
भारतीय रेलवे का इनवेस्टमेंट
रेलवे के लिए कुल टेंडर राशि 30,000 से 35,000 करोड़ रुपए के बीच होने का अनुमान है. यह पर्याप्त निवेश प्रति LHB कोच करोड़ 2 करोड़ रुपए की प्रोडक्शन कॉस्ट को दर्शा रहा है. इसमें AC और नॉन-AC दोनों कोच शामिल किए जाएंगे. साथ ही वंदे भारत ट्रेनें भी अपग्रेड का हिस्सा होंगी. इस कदम का उद्देश्य पुराने ICF कोचों को नए कोचों से बदलना. साथ ही ज्यादा नई ट्रेनें चलाना है. इसका टारगेट पैसेंजर्स ज्यादा ऑप्शन देना, कन्फर्म टिकट मिलना और आरामदायक यात्रा सुनिश्चित करना भी है.
टेडर्स के लिए दिग्गज कंपनियों ने जताया इंटरेस्ट
फेजवाइज टेंडर प्रॉसेस में अलग-अलग साइज के टेंडर जारी किए जाएंगे. उदाहरण के तौर पर एक टेंडर में 500 स्लीपर कोच शामिल हो सकते हैं जबकि दूसरे में 1,000 शामिल हो सकते हैं. इस लिहाज से 3 सालों में 15,000 स्लीपर कोचों के बनाना है. इसके लिए BEML, एल्सटॉम और मेघा इंजीनियरिंग जैसी प्रमुख कंपनियां प्रोजेक्ट को लेकर रुचि दिखा रही हैं.

हाई डिमांड वाले रूट्स पर फोकस
मौजूदा ट्रेनों को अपग्रेड करने के अलावा भारतीय रेलवे का फोकस हाई डिमांड वाले रूट्स पर नई ट्रेनें शुरू करने पर भी है. इसका स्ट्रैटेजिक टारगेट ज्यादा ट्रैवल ऑप्शनमुहैया करना और कन्फर्म टिकटों के लिए वेटिंग टाइम कम करके पैसेंजर्स के लिए बेहतर सर्विस ऑफर करना है.
इन नए स्लीपर कोच और ट्रेनों की शुरुआत भारतीय रेलवे के पैसेंजर्स-बेस्ड सर्विसेज में सुधार के ब्रॉडर टारगेट के लिहाज से है. इसके तहत मॉडर्नाइजेशन और अपने नेटवर्क का विस्तार करने में भारी निवेश करके भारतीय रेलवे अपने पैसेंजर्स के लिए ज्यादा आरामदायक और बेहतर ट्रैवल एक्सपीरियंस देने के लिए तैयार है.


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