Hydrogen Train: देश में हर दिन लाखों लोग ट्रेन से ट्रेवल करते हैं. देश में अभी वंदे भारत, राजधानी, शताब्दी और तेजस जैसी हाई स्पीड ट्रेने चलती है. वहीं बुलेट ट्रेन का काम भी तेजी से चल रहा है. ऐसे में खबर है कि जल्द ही ऐसी ट्रेन आएगी जो हवा के जरिए चलेगी. इस ट्रेन की शुरुआत 2024-2025 के बीच हो सकती है. चलिए इसके बारे में डिटेल में जानते हैं.

देश को जल्द ही पहली ऐसी ट्रेन मिलने वाली है, जो हाइड्रोजन से चलती हो. इस बारे में मिली जानकारी के मुताबिक इस ट्रेन का ट्रायल इस साल के अंत तक शुरू हो सकता है. चलिए जानते हैं कि क्या है हाइड्रोजन ट्रेन और ये किन रूट पर चलेगी.
इस साल के अंत या 2025 तक देश को पहली हाइड्रोजन ट्रेन मिलने वाली है. ये ट्रेन हवा से चलेगी.
What is Hydrogen Train: क्या होती है हाइड्रोजन ट्रेन
भारतीय रेलवे खुद को साल 2030 तक नेट जीरो कार्बन एमिटर बनाना चाहती है. इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ही रेलवे हवा से चलने वाली ट्रेन यानी हाइड्रोजन ट्रेन लाने वाली है. वहीं इस ट्रेन का ट्रायल साल 2024 के अंत हो सकता है. वहीं इसकी सुरक्षा ऑडिट के लिए जर्मनी के TUV-SUD को हायर किया जा रहा है.
इस ट्रेन को सबसे पहले उत्तर रेलवे जोन में चलाया जा सकता है. रेलवे बहुत जल्द 35 नई हाइड्रोजन ट्रेन को लाने की तैयारी में जूट चुका है. इस ट्रेन में डीजल का उपयोग नहीं किया जाता है. इसलिए हाइड्रोजन ट्रेनों की मदद से कई हद तक प्रदूषण को कंट्रोल किया जा सकता है.
Hydrogen Train: किन रूट पर चलना होगी शुरू?
इस बारे में मिली जानकारी के मुताबिक देश के उत्तरी रेलवे जोन में जल्द ही हाइड्रोजन ट्रेन चलना शुरू हो जाएगी. ये ट्रेन हरियाणा से जींद-सोनीपत के अलावा कई अन्य रूट पर भी चलना शुरू होगी. हाइड्रोजन ट्रेन दार्जिंलिंग हिमालयन रेलवे, कांगड़ा घाटी, बिलमोरा वाघई, नीलगिरी माउंटेन रेलवे, कालका शिमला रेलवे, माथेरान रेलवे और मारवाड़-देवगढ़ मदारिया रूट पर चलना शुरू हो सकती है. इस ट्रेन की स्पीड 140 किमी/घंटे होगी.
वहीं ये नई तकनीक वाली हाइड्रोजन ट्रेन 1000 किमी तक चल सकती है. हालांकि इस ट्रेन को पहले छोटे रूट पर ही चलाया जाएगा.
कैसे करती है हाइड्रोजन ट्रेन काम ?
इस बारे में मिली जानकारी के मुताबिक हाइड्रोजन ट्रेन में किसी भी तरह ईंधन इस्तेमाल नहीं होता है. ये ट्रेन पूरी तरीके से बिजली से चलती है. हाइड्रोजन ट्रेन, हाइड्रोजन फ्यूल सेल्स की मदद से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को बदलकर बिजली पैदा करती है. इसी बिजली का इस्तेमाल ट्रेन को चलाने के लिे किया जाता है. इस ट्रेन से कोई भी दुंआ नहीं आता है और इसलिए इस ये ट्रेन पर्यावरण के लिए कम हानिकारक है.


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