ट्रेन हादसों से बचाता है ये सिस्टम! ऑटोमैटिक रूप से करता है काम, यहां शुरु हो चुका है इसका इस्तेमाल

Indian Railway Kavach System: पश्चिम बंगाल के रानीपतरा रेलवे स्टेशन और चतर हाट जंक्शन के बीच ट्रेन हादसा देखने को मिला। इसके बाद से ही रेलवे सेवाएं इस रूट पर बाधित थी।

वैसे तो इस रेल एक्सीडेंट के पीछे मालगाड़ी के ड्राइवर की लापरवाही को वजह बताया जा रहा है। रेल मंत्रालय ने एक्सीडेंट की जांच के लिए एक टीम बना दी है, लेकिन क्या आपको पता है कि साल 2022 में एक ऐसे सिस्टम की टेस्टिंग की गई थी जिससे ट्रेनों के बीच होने वाले हादसों को रोका जा सकता है। आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये कैसा सिस्टम है और यह किस तरह काम करता होगा। तो चलिए इसके बारे में आपको बताते हैं।

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इस सिस्टम से रोका जा सकता है ट्रेन हादसा

कवच एक स्वदेशी रूप से बनाया गया ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है। कवच एक सुरक्षा स्तर-4 मानक की एक अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम है। कवच का उद्देश्य खतरे (लाल) पर सिग्नल पार करने वाली ट्रेनों को सुरक्षा प्रदान करना और टकराव से बचाना है।

अगर ट्रेन रका चालक ट्रेन को नियंत्रित करने में विफल रहता है तो यह ऑटोमैटिक रूप से ट्रेन ब्रेकिंग सिस्टम को ऑन करता है। कवच प्रणाली दो लोकोमोटिव के बीच टकराव को रोकता है।

इसे रिसर्च डिजाइन एवं स्टैंडर्ड ऑर्गनाइजेशन ने भारतीय उद्योग के सहयोग से विकसित किया गया है। कवच सिस्टम का परीक्षण साल 2022 में सिकंदराबाद डिवीजन में गुल्लागुडा-चिटगिड्डा रेलवे स्टेशनों के बीच किया गया था।

बेहद खास है यह सिस्टम

इस सिस्टम में कई सारे फीचर्स हैं जो इसे अलग बनाते हैं। खतरे में सिग्नल पासिंग की रोकथाम, ड्राइवर मशीन इंटरफेस / लोको पायलट ऑपरेशन सह इंडिकेशन पैनल में सिग्नल पहलुओं के प्रदर्शन के साथ मूवमेंट अथॉरिटी का निरंतर अपडेट भी इसके अनोखे फिचर्स हैं।

इसके अलावा अधिक गति से वाहन चलाने से रोकने के लिए ऑटोमैटिक ब्रेक लगाना, लेवल क्रॉसिंग गेट के पास पहुंचते समय ऑटोमैटिक सीटी बजाना, कवच से लैस दो इंजनों के बीच टकराव की रोकथाम, आपातकालीन स्थितियों के दौरान SoS मैसेज, और नेटवर्क मॉनिटर सिस्टम के माध्यम से ट्रेनों की आवाजाही की केंद्रीकृत लाइव निगरानी भी इसके फीचर्स हैं।

इन जगहों पर हो रहा है कवच सिस्टम का इस्तेमाल

रेलवे बोर्ड के मुताबिक देश के कई ट्रेन रूटों पर इसका इंस्टॉलेशन किया जा रहा है। हालांकि, जहां हाल ही में कंचनजंगा एक्सप्रेस का एक्सीडेंट हुआ वहां फिलहाल यह सिस्टम नहीं इंस्टॉल हुआ है। देश में फिलहाल 1500 किलोमीटर के ट्रैक पर कवच काम कर रहा है।

इस साल जो 3000 किलोमीटर में कवच लगने हैं उसमें दिल्ली हावड़ा रूट भी है। कवच सप्लाई करने वालों को प्रोडक्शन बढ़ाने को कहा गया है।

रेलवे के दावे के अनुसार, ट्रेन रूटों पर इस साल 3000 किलोमीटर में कवच लग जाएंगे और अगले साल की 3000 किलोमीटर की और प्लानिंग है।

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