Impact of monsoon on agriculture: भारत में बढ़ती बारिश से कई राज्यों का बुरा हाल है. गुजरात, मध्यप्रदेश और हिमाचल प्रदेश में बारिश के कहर से बाढ़ जैसे हालात बने हुए है. ऐसा कहा जा रहा है कि इस साल मानसून अक्टूबर तक रह सकता है. इस बढ़ते मानसून से किसान की फसलों पर भी प्रभाव पड़ सकता है.

मौसम विभाग ने यह जानकारी दी है कि इस साल भारत में अक्टूबर के मध्य तक मानसून रह सकता है. भारत की राजधानी दिल्ली सहित कई राज्यों में लगातर बारिश हो रही है. इस साल मानसून की बारिश ने लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत दी है. लेकिन अब यह मानसून की बारिश किसानों के लिए शापित हो सकती है.
इस साल मानसून लंबे समय तक रहने वाला है. मानूसन में होने वाली भारी बारिश से किसानों की फसलों को नुकसान हो सकता है. इस बारे में मिली जानकारी के मुताबिक गर्मियों के सीजन में बोई जाने वाली फसल को भारी नुकसान हो सकता है.
इन फसलों में चावल, कपास, सोयाबीन, भुट्टा और दाल को भारी नुकसान हो सकता है. इन सभी फसलों को गर्मी के मौसम में बोया जाता है. वहीं सिंतबर का महीना इन फसलों की कटाई का समय होता है. लेकिन बढ़ती बारिश से किसानों की पक्की पकाई फसल खराब हो सकती है.
अगर यह सही साबित होता है, तो देश में फुड इंफ्लेशन (Food inflation) हो सकता है. जिसका मतलब है कि खाने-पीने की चीजों के दाम और बढ़ सकते हैं.
लेकिन यह बारिश शीत ऋतु की फसलों के लिए वरदान है. मानसून की बढ़ती बारिश ने मिट्टी को काफी उपजाऊ बना दिया है. इसलिए इसे ठंड के समय रोपी जाने वाली फसलों के लिए काफी अच्छा मना जा रहा है.
मानूसन की बढ़ती बारिश गेंहू, रेपसीड और मटर की फसलों के लिए काफी अच्छी है.
बढ़ती बारिश से निर्यात पर पड़ेगा असर
इस बारे में मिली जानकारी के मुताबिक भारत को गेंहू, चावल और चीनी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक माना जाता है. अगर मानूसन की बारिश जारी रही तो यह विदेशी मार्केट पर भी अपना बड़ा असर डाल सकता है. देश में निर्यात को लेकर पहले से कई प्रतिबंध लगाए गए है.
अगर यह बारिश ऐसी जारी रही तो इससे किसानों की फसल बड़े पैमाने पर खराब हो सकती है. जिससे देश में इन फसलों के निर्यात में और भी ज्यादा रोक लग सकती है.
इन विदेशी देशों पर होगा असर
भारत चावल उत्पादन के मामले में दूसरे नंबर पर आता है. साल 2023 में देश में लगभग 135 मिलियन मेट्रिक टन चावल का उत्पादन किया था. इस बारे में मिली जानकारी के मुताबिक साल 2023 में भारत के कुल चावल उत्पादन का 12.2 फीसदी सऊदी अरब को निर्यात किया गया था. इसके अलावा ईरान, इराक, यमन, यूएसए, टोगो इत्यादि जगहों पर चावल का निर्यात किया गया था.
अगर इस साल के बढ़ते मानसून से चावल के फसल को नुकसान होता है, तो इन देशों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है.
यह भी पढ़े: Weather update: दिल्ली में येलो अलर्ट जारी, इन दिनों हो सकती है झमाझम बारिश
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