नयी दिल्ली। भारतीय आईटी कंपनियां शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। बेहतर प्रदर्शन के दम पर आईटी कंपनियों की डिजिटल इनकम 50 अरब डॉलर के पार पहुंच गई है। मुश्किल से तीन साल पहले एआई / एमएल, सेंसर और रोबोटिक जैसे नए डिजिटल क्षेत्रों में टेक्नोलॉजी में तरक्की वाले विश्लेषक थे, मगर वो इस बात को लेकर आश्वस्त थे कि भारतीय आईटी सेक्टर इन परिवर्तनों के साथ आगे नहीं बढ़ रहा है। कुछ विश्लेषकों ने भारतीय आईटी सेक्टर में प्रमुख कंपनियों के खत्म होने की भी भविष्यवाणी की थी। मगर सामने आए आंकड़े दूसरी ही कहानी बता रहे हैं। भारतीय आईटी एसोसिएशन नैसकॉम के आंकड़े बताते हैं कि नए डिजिटल क्षेत्रों ने पिछले वित्त वर्ष में 50 अरब डॉलर की इनकम हासिल की। पिछले वित्त वर्ष में आईटी कंपनियों की कुल इनकम 191 अरब डॉलर रही। यानी इसमें डिजिटल इनकम एक-चौथाई से अधिक रही।
टीसीएस और इंफोसिस रहीं आगे
आईटी कंपनियों की कुल इनकम में एक चौथाई से ज्यादा डिजिटल सर्विसेज का योगदान रहा। मगर कुछ कंपनियों के लिए ये योगदान और भी अधिक रहा। जैसे कि टीसीएस, इंफोसिस और विप्रो ने डिजिटल सेवाओं से क्रमश: 33 फीसदी, 42 फीसदी और 41 फीसदी इनकम हासिल की। जानकारी के लिए बता दें कि कंपनियां डिजिटल को अलग-अलग तरह से परिभाषित करती हैं, इसलिए ये आंकड़े वास्तव में तुलनीय नहीं है। लेकिन वे फिर भी ये आईटी कंपनियों द्वारा डिजिटल में की गई प्रगति को दर्शाते हैं। नैसकॉम ने 2012 से डिजिटल इनकम अलग से पेश करना शुरू किया। उस साल डिजिटल क्षेत्र की इनकम सिर्फ 4 फीसदी थी। 2015-16 में यह 16 से 20 अरब डॉलर आंकी गई थी, जो कुल आईटी सेवाओं की इनकम का 11%-14% था।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
एक्सपर्ट कहते हैं कि भारतीय आईटी कंपनियों ने विश्वास के संबंध और विकास के माध्यम से एक महत्वपूर्ण छवि बनाई है। आज भारतीय आईटी फर्म में डेलॉइट और आईबीएम जैसी कई पारंपरिक इंटीग्रेटेड फर्म्स का विकल्प हैं और उच्च-स्तरीय डिजिटल वर्क करने की क्षमता रखती हैं। इस विस्तार के पीछे 2 मुख्य कारण हैं जिनमें टेक्नोलॉजी के लिए लगाव और बड़े पैमाने पर उद्यमशीलता शामिल है। भारतीय आईटी एक्सपर्ट ने नई प्रोग्रामिंग भाषाएं सीखी हैं और लो-कोड सॉफ्टवेटर में दक्षता हासिल की है।
कैसा रहेगा आगे का सफर
पिछले तीन-चार वर्षों में भारतीय आईटी कंपनियों ने आक्रामक तरीके से नई डिजिटल तकनीकों में कर्मचारियों को फिर से ट्रेन करने में निवेश किया है। नई तकनीकों में महारत वाले ऑनसाइट कर्मचारियों की भर्ती की गई है। जहां तक फ्यूचर का सवाल है तो एक्सपर्ट कहते हैं कि वे कंपनियां जो एक्सपोटेंशियल कर्व्स को समझेंगी वहीं फ्यूचर में अपना दबदबा कायम कर सकेंगी।
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