Indian Economy : तीसरी तिमाही में विकास दर रह गयी 4.4 फीसदी, महंगाई ने बिगाड़ा खेल
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GDP Growth Rate : अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लिए भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) घट कर 4.4 प्रतिशत रह गयी। ये आंकड़े आज मंगलवार को सांख्यिकी मंत्रालय की तरफ से जारी किये गये हैं। सरकार की तरफ से प्रेस रिलीज में कहा गया है कि 2022-23 की तीसरी तिमाही में कॉन्सटैंट (2011-12) कीमतों पर जीडीपी 40.19 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। 2021-22 की तीसरी तिमाही में जीडीपी 38.51 लाख करोड़ रुपये रही थी। उसकी तुलना में जीडीपी ग्रोथ 4.4 प्रतिशत की रही। 2022-23 की तीसरी तिमाही में मौजूदा कीमतों (करेंट प्राइस) पर जीडीपी 69.38 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि 2021-22 की तीसरी तिमाही में यह 62.39 लाख करोड़ रुपये थी, जो 11.2 प्रतिशत की वृद्धि है।

7 फीसदी रह सकती है ग्रोथ रेट

7 फीसदी रह सकती है ग्रोथ रेट

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2022-23 में भारतीय अर्थव्यवस्था के 7 फीसदी की दर से बढ़ने की उम्मीद है। यानी चालू वित्त वर्ष में विकास दर 7 फीसदी रह सकती है। यह भी कहा गया है कि 2021-22 के लिए विकास दर को पहले के 8.7 प्रतिशत से संशोधित कर 9.1 प्रतिशत कर दिया गया है। बता दें कि महामारी के बाद जीडीपी काफी गिरी थी, जिसके बाद जब आर्थिक रिकवरी हुई तो विकास दर वित्त वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही में 13.5 प्रतिशत पर पहुंच गयी थी। पर पिछली तिमाही (जुलाई-सितंबर) में यह 6.3 प्रतिशत पर आ गयी थी।

महंगाई ने बिगाड़ा खेल

महंगाई ने बिगाड़ा खेल

तीसरी तिमाही में जीडीपी विकास दर में गिरावट के एक कारण रहा है देश में उच्च मुद्रास्फीति, जिसे कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की तरफ से दरों में काफी आक्रामक तरीके से बढ़ोतरी की गयी। इसके अलावा बहुत अधिक गिरावट के बाद जीडीपी में उछाल आई और अब इसका सामान्यीकरण हो रहा है, जिसे एक और कारण माना जा सकता है।

 कैसा रहा जीवीए

ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) में बढ़ोतरी दर्ज की गयी है। तीसरी तिमाही में जीवीए में साल दर आधार पर 4.6 फीसदी की वृद्धि हुई। वहीं सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीवीए ग्रोथ अनुमान को 6.7% से संशोधित कर 6.6% कर दिया है।

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निर्यात और कंज्यूमर डिमांड

निर्यात और कंज्यूमर डिमांड

ऊपर बताए गये कारणों के अलावा निर्यात और कंज्यूमर डिमांड में मंदी ने भी जीडीपी नंबरों को नीचे गिराया। बता दें कि पिछले कुछ महीनों में मुद्रास्फीति को कम करने के लिए आरबीआई ने तेजी से दरों में बढ़ोतरी की, जिसका नतीजा उपभोक्ता मांग में कमी के रूप में सामने आया है। वहीं बाहरी मांग (एक्सटर्नल डिमांड) में मंदी दुनिया भर के प्रमुख केंद्रीय बैंकों की तरफ से दरों में बढ़ोतरी का नतीजा हो सकती है।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में गिरावट
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में पिछली तिमाही की तुलना में 1.1 प्रतिशत की कमी आई, तब इसमें 3.6 प्रतिशत की गिरावट आई थी। वहीं कृषि सेक्टर ने दूसरी तिमाही में 2.4 प्रतिशत की तुलना में तीसरी तिमाही में 3.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के अर्थशास्त्रियों ने दिसंबर तिमाही के लिए 4.6 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान लगाया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि 30 हाई फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स उतने मजबूत नहीं रहे, जितने पिछली तिमाहियों में थे।

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