Indian Economy News: आपको बताते चलें कि यह साल भारत की अर्थव्यवस्था के लिए काफी बेहतर रहा है। जहां एक तरफ राजकोषीय घाटे में कमी आई है, वहीं दूसरी तरफ कोर्स सेक्टर के उत्पादन में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसके अलावा इस फाइनेंशियल ईयर में जीडीपी का अनुमान भी बढ़ा दिया गया है। ऐसी उम्मीद भी जताई जा रही है कि महंगाई दर में भी स्थिरता बनी रह सकती है।
इसके अलावा भारत की अर्थव्यवस्था में जो तीन मुख्य और बड़े बदलाव की बात आज हम करने जा रहे हैं उसमें 1 साल पहले के मुकाबले राजकोषीय घाटे में आई कमी, सालाना आधार पर कोर सेक्टर में बढ़ोतरी और विदेशी मुद्रा भंडार में 21 महीने का का हाई स्तर शामिल है।

बढ़ गया भारत का मुद्रा भंडार
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार दिसंबर के महीने की 22 तारीख को समाप्त हुए हफ्ते में 4.47 अरब डॉलर बढ़कर 620,44 अरब डालर तक पहुंच चुका है। मीडिया रिपोर्ट्स और जारी किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि यह पिछले 21 महीने का उच्चतम स्तर है। इसके पहले साल 2021 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 645 अरब डॉलर का था, जो अब तक का सबसे उच्चतम स्तर रहा है।
सरकार का राजकोषीय घाटा नवंबर महीने के अंत तक 9.6 लाख करोड़ रुपए रह गया है। आपको बताते चलें कि यह पूरे फाइनेंशियल ईयर के बजट अनुमान का 50.7 फीसदी है। सीजीए ने आंकड़े जारी करके बताया है कि मौजूदा वित्त वर्ष 2023-24 में अप्रैल से नवंबर तक के समय में राजकोषीय घटना 9,06,584 करोड़ रुपए रहा। पिछले फाइनेंशियल ईयर में इस अवधि का घाटा बजट अनुमान का 58.9 प्रतिशत था। यानी पिछले साल के मुकाबले इस साल बजट के अनुमान के मुकाबले राजकोषीय घाटे में 8 प्रतिशत तक की कमी आई है।
आपकी जानकारी के लिए बता दे की सरकार की अनुमान के मुताबिक इस वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटा 17.8 करोड़ रुपए तक रहने का अनुमान लगाया गया था। यह जीडीपी का 5.9 प्रतिशत था। आपको बता दें की सरकार के द्वारा कुल खर्च और राजस्व के बीच के अंतर को राजकोषीय घाटा बोलते हैं। आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से नवंबर 2023 के टाइम पीरियड में सरकार का कुल खर्च 26.52 लाख करोड़ रुपए था।
सालाना आधार पर इस बार कोड सेक्टर का उत्पादन करीब 7.8 प्रतिशत तक बढ़ा है। ध्यान देने वाली बात यह है कि 1 साल पहले किस टाइम पीरियड के लिए यह आंकड़ा 5.7 प्रतिशत का था। नवंबर के महीने में क्रूड ऑयल का सीमेंट सेक्टर को छोड़कर बाकी सभी क्षेत्रों में प्रोडक्शन में अच्छी ग्रोथ देखने को मिली है।
आपको बताते चलें की वेडिंग फंक्शन और फेस्टिव सीजन की वजह से कंस्ट्रक्शन वर्क में कमी आने की वजह से सीमेंट की डिमांड में भारी गिरावट देखने को मिली थी। प्रमुख कोर सेक्टर जिसमें कोयल, कच्चा तेल, नेचुरल गैस, स्टील सीमेंट और बिजली की वृद्धि दर अक्टूबर के महीने में 12 प्रतिशत रही थी।
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