Indian Bank: बड़े भारतीय बैंक पश्चिम देशों के प्रतिबंधों के डर से रूस के साथ रुपये में सीधे लेनदेन से बच रहे हैं। भारतीय बैंकों को डर है कि अगर उन्होंने रूस के साथ रुपए में लेनदेन शुरू किया तो पश्चिम के देश समेत दुनिया के अन्य देशों में उकना कारोबार प्रभावित हो सकता है।
भारतीय बैंक नहीं दिखा रहे हैं दिलचस्पी
रॉयटर्स की खबर के मुताबिक पिछले एक महीने में केवल भारतीय स्टेट बैंक ने आपसी व्यापार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक सरलीकृत रुपया निपटान तंत्र स्थापित करने पर सहमति बनाई है। खबर के मुताबिक भारतीय राजनयिक ने बताया कि रूसी बैंकों ने अनुरोध किया था कि भारत के आठ सबसे बड़े बैकों को स्थानीय मुद्रा में लेनदेन शुरू करने के लिए कदम बढ़ाया जाए लेकिन किसी बड़े बैंक ने इसपर सहमति नहीं दी है।
रुस के बैंकों ने किया था अनुरोध
भारत में व्यापार करने वाले बड़े बैंकों में भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया नाम शामिल हैं। खबर के अनुसार रुस के बैंक अभी तक एसबीआई को छोड़कर किसी भी बड़े सरकारी या प्राइवेट बैंक से किसी प्रकार की कोई सहमती नहीं पा पाए हैं। अनुमान यह लगाया जा रहा है कि बड़े बैंक पश्चिम देशों के प्रतिबंध के डर से ऐसा कदम उठाने से डर रहे हैं।
प्रतिबंधित होने से डर रहे हैं बैंक
देश के एक बड़े बैंक के एक वरिष्ठ कार्यकारी के अनुसार, वित्तीय संस्थाएं रूस के साथ रुपये में व्यापार करने से इसलिए बच रही हैं क्योंकि वे अमेरिका और यूरोपीय संघ द्वारा प्रतिबंधित नहीं होना चाहती है। बैंकों का मानना है कि पश्चिमी राष्ट्र हम पर प्रतिबंध लगा सकते हैं जिसके कारण बैंकों को भारी नुकसान सहना पड़ सकता है। वर्तमान में केवल दो छोटे ऋणदाता बैंक यस बैंक और यूको बैंक रूस के पीएससीबी और गज़प्रॉमबैंक के साथ समझौता के तौर पर रुपए में भुगतान सिस्टम का उपयोग कर रहे हैं।


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