नयी दिल्ली। भारतीय एयरलाइन इंडस्ट्री अच्छी हालत में नहीं है। लॉकडाउन के कारण एयरलाइन उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ है। विमानन कंसल्टेंसी फर्म सीएपीए इंडिया ने एक रिपोर्ट में बताया है कि बंद होने से बचने के लिए भारतीय एयरलाइनों को कम से कम 2.5 अरब डॉलर की जरूरत होगी। हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक इंडिगो, जो प्रमुख एयरलाइन कंपनी है, की हालत फिर भी अच्छी है। अन्य भारतीय कैरियर्स की तुलना में इंडिगो का नकद भंडार (1.13 बिलियन डॉलर का फ्री कैश और 1.33 अरब डॉलर का रेस्ट्रिक्टेड कैश) काफी बेहतर स्थिति में है। हालांकि यह कैश रिजर्व लंबी अवधि के संकट को संभालने के लिए इंडिगो के लिए कम पड़ सकता है।

स्थिति में सुधार की जरूरत
सीएपीए ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि एयरलाइन सेक्टर के लिए 2.5 अरब डॉलर बाजार में फिर से शुरुआत तक के लिए पर्याप्त होगा। मगर सेक्टर में रिकवरी के लिए और भी फंड की जरूरत पड़ सकती है। रिपोर्ट कहती है कि एयरलाइन सेक्टर की रिकवरी अर्थव्यवस्था की स्थिति और किसी वैक्सीन या इलाज जैसे कारकों पर निर्भर करेगी। मगर इस बीच अगर यात्रियों को रिफंड का फैसला सुप्रीम कोर्ट में एयरलाइन के खिलाफ गया तो फिर और 30 करोड़ डॉलर की जरूरत होगी। सुप्रीम कोर्ट ने 27 अप्रैल को नागरिक उड्डयन मंत्रालय को एक नोटिस जारी किया था जिसमें लॉकडाउन के दौरान यात्रा के लिए बुक किए गए टिकटों पर पूरा रिफंड मांगा गया है।
कितना रहेगा एयर ट्रेफिक
इस बीच सीएपीए इंडिया ने घरेलू यात्रियों की संख्या वित्त वर्ष 2020-21 में 5.5-7 करोड़ रहने का अनुमान लगाया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या 2-2.7 करोड़ रह सकती है। इससे पहले आईएटीए (इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन) ने कहा था अगर तीन महीनों के लिए इतने गंभीर प्रतिबंध जारी रहे तो इसके ताजा अनुमान के मुताबिक वार्षिक यात्री आमदनी में 252 अरब डॉलर की भारी भरकम गिरावट आएगी, जो पिछले साल के मुकाबले एयरलाइन इंडस्ट्री की आमदनी में 44 फीसदी क गिरावट होगी।


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