नई दिल्ली। क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) समझौते में भारत ने शामिल होने से इनकार कर दिया है। भारत का कहना है कि आरसीईपी में शामिल होने से पहले यह संगठन भारत की चिंताओं को दूर करने में असफल रहा है। दरअसल आरसीईपी में चीन का दबदबा है। चीन नहीं चाहता था कि भारत को चीन के उत्पादों पर रोक लगाने का अधिकार मिले। वहीं भारत को आशंका है कि चीन अपने सस्ते उत्पाद आरसीईपी के रास्ते से भारत में डंप कर सकता है। यही कारण है कि भारत ने आरसीईपी में शामिल होने से इनकार कर दिया है। वैसे भी भारत का आरसीईपी में शामिल 16 देशों के साथ वार्षिक करीब 150 अरब डालर का व्यापार घाटा है। ऐसे में अगर भारत बिना सेफगार्ड के इसमें शामिल होता तो उसका यह घाटा और बढ़ता। भारत के इस फैसले की कारोबारी संगठनों ने तारीफ की है। वहीं भारत के इस कदम से चीन को झटका लगना यह है। चीन इस समय अमेरिका से ट्रेड वॉर को लेकर परेशान है। ऐसे में उसे आरसीईपी में शामिल होने पर भारत को निर्यात बढ़ाने की उम्मीद थी। यही कारण था कि चीन भारत को विशेष रियायतें मिलने में लगातर रोड़ा अटका रहा था। लेकिन भारत के कठोर निर्णय से अब चीन को झटका लगा है।
पीएम मोदी ने की घोषणा
भारत सरकार ने कहा है कि देश हितों को ताक पर रखकर इस व्यापारिक समझौते का हिस्सा नहीं बन सकता है। खुद पीएम मोदी ने थाईलैंड के बैंकॉक में चल रहे रीजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप के मंच पर अपने भाषण में ये बात कही। बाद में विदेश मंत्रालय ने अपने बायान में कहा है कि आरसीईपी में शामिल होने के लिए भारत के महत्वपूर्ण मुद्दों को हल नहीं किया गया, जिसके कारण यह फैसला लेना पड़ा।
आरसीईपी समझौता क्या है
आरसीईपी सदस्य देशों के बीच एक ट्रेड समझौता है। आरसीईपी में आसियान के 10 देश शामिल हैं। आसियान के साथ 6 अन्य देश भी इसमें शामिल होने वाले था, लेकिन अब इसमें भारत शामिल नहीं होगा। ऐसे में यह अब 15 देशों का संगठन होगा। इसमें सदस्य देशों के साथ व्यापार में कई सहूलियतें दी गई हैं। इसमें निर्यात पर लगने वाला टैक्स नहीं या फिर कम लगेगा।
इन लोगों का रखा गया खयाल
भारत के फैसले से किसानों, सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उपक्रमों (एमएसएमई) और डेयरी सेक्टर को फायदा मिलेगा। जानकारी के अनुसार आरसीईपी पर भारत का रुख काफी व्यावहारिक रहा है! भारत ने जहां गरीबों के हितों के संरक्षण की बात की, वहीं देश के सेवा क्षेत्र को लाभ की स्थिति देने का भी प्रयास किया। जानकारी के अनुसार भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में वैश्विक प्रतिस्पर्धा को खोलने में कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाई है। लेकिन यहां पर मामला भारत के हितों से था। ऐसे में सरकार ने कड़ा फैसला लिया है।
काफी बड़ा मुक्त व्यापार क्षेत्र है आरसीईपी
आरसीईपी में 10 आसियान देशों के अलावा 6 मुक्त व्यापार भागीदार देश चीन, भारत, जापान, दक्षिण, कोरिया, भारत, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड को शामिल होना था। अब भारत इसमें शामिल नहीं होगा।
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