टेक्सटाइल और ऑटो सेक्टर की चांदी! भारत-अमेरिका ट्रेड डील से एक्सपोर्टर्स को मिला बड़ा टैक्स बेनेफिट

India US Trade Deal: कई महीने से चल रही अनिश्चितता और ट्रेड दबाव के बाद भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील आखिर कामियाब हो गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत करने के बाद इस डील का ऐलान हुआ है।

इस डील के बाद टैरिफ नीति में काफी बदलाव देखने को मिला है। वहीं, इंडियन एक्स्पोर्टर्स को काफी फायदा मिलता दिख रहा है। माना जा रहा है इस डील के बाद भारत और अमेरिका के बीच कारोबारी रिश्तों में और मजबूती मिलेगी।

India-US Trade Deal 2026

टैरिफ में कटौती से राहत

इस समझौते का सबसे अहम पहलू टैरिफ में कमी है। अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ 25 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया है। अब भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में पहले की तुलना में सस्ता पड़ेगा। इससे टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग, ऑटो पार्ट्स और केमिकल जैसे सेक्टर को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से टैरिफ को लेकर बनी अनिश्चितता अब काफी हद तक खत्म हो गई है।

पुराने कड़े फैसलों से पीछे हटा अमेरिका

पिछले कुछ महीनों में अमेरिका की ओर से भारत पर कड़े टैरिफ लगाने की बातें सामने आई थीं। इससे भारतीय उद्योगों में चिंता बढ़ गई थी। लेकिन नई ट्रेड डील के बाद अमेरिका ने अपने कई पुराने फैसलों से यू-टर्न लिया है। इससे बाजार में भरोसा लौटा है और निवेशकों का मनोबल भी मजबूत हुआ है।

एनर्जी और तेल पर बनी सहमति

इस समझौते में एनर्जी सेक्टर को भी खास जगह दी गई है। भारत ने अमेरिका से ज्यादा मात्रा में तेल, गैस और अन्य ऊर्जा संसाधन खरीदने पर सहमति जताई है। इससे दोनों देशों के बीच संतुलन बनेगा और व्यापारिक रिश्ते और मजबूत होंगे। एनर्जी सेक्टर में यह सहयोग आने वाले वर्षों में और बढ़ सकता है।

जीरो टैरिफ की ओर कदम

डील के तहत भारत ने भी कुछ अमेरिकी उत्पादों पर टैक्स और अन्य अड़चनों को कम करने पर सहमति दी है। इससे आने वाले समय में कई सामानों पर जीरो टैरिफ लागू हो सकता है। इसका फायदा सीधे उपभोक्ताओं को मिलेगा, क्योंकि टेक्नोलॉजी, खेती से जुड़े उत्पाद और मशीनरी सस्ती हो सकती हैं।

500 अरब डॉलर से ज्यादा का व्यापार लक्ष्य

इस समझौते के साथ भारत और अमेरिका ने आपसी व्यापार को नई ऊंचाई तक ले जाने का टारगेट रखा है। भारत अमेरिका से बड़े पैमाने पर खरीदारी करेगा, जबकि अमेरिका में भारतीय निर्यात भी तेजी से बढ़ेगा। माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार का आंकड़ा 500 अरब डॉलर से आगे जा सकता है।

बाजार और उद्योग के लिए अच्छे संकेत

यह ट्रेड डील भारत और अमेरिका दोनों के लिए फायदेमंद मानी जा रही है। इससे न सिर्फ निर्यात और निवेश बढ़ेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। उद्योग जगत इस समझौते को लंबे समय की स्थिरता और विकास की दिशा में एक अहम कदम मान रहा है।

एक्सपर्ट ने कही ये बात

पॉल एसेट में इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट और 129 वेल्थ फंड में फंड मैनेजर प्रसेनजीत पॉल की तरफ से भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर, स्टॉक मार्केट के लिए आपकी जानकारी के लिए ऐतिहासिक भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट ने उस अनिश्चितता को खत्म कर दिया है जिसने भारतीय इक्विटी के आउटलुक पर बादल छाए हुए थे, जिससे ग्लोबल इन्वेस्टर्स के सेंटिमेंट में बदलाव आया है, जिन्होंने टैरिफ के डर से इन्वेस्टमेंट रोक दिया था।

टैरिफ को 18% पर सीमित करके और आपसी मार्केट एक्सेस के लिए एक फ्रेमवर्क स्थापित करके, यह डील एक बड़े जियोपॉलिटिकल रिस्क को एक स्ट्रक्चरल टेलविंड में बदल देती है, खासकर IT सर्विसेज, टेक्सटाइल्स और ऑटो एंसिलरी जैसे एक्सपोर्ट पर निर्भर सेक्टर्स के लिए जो ऊंचे ड्यूटी के लिए तैयार थे। इन ट्रेड रुकावटों को हटाने से फॉरेन पोर्टफोलियो इनफ्लो (FPI) के फिर से शुरू होने की उम्मीद है, जो हाल के मार्केट कंसोलिडेशन में गायब था, जिससे वैल्यूएशन प्रीमियम को सपोर्ट मिलेगा।

तत्काल टैरिफ राहत के अलावा, एनर्जी और डिफेंस खरीद पर रणनीतिक तालमेल इंडिया इंक. के लिए एक मजबूत लॉन्ग-टर्म ग्रोथ कॉरिडोर बनाता है, जो 'चाइना प्लस वन' नैरेटिव को सही साबित करता है। इक्विटी पार्टिसिपेंट्स के लिए, यह एक साफ संकेत है कि शॉर्ट-टर्म वोलैटिलिटी को नजरअंदाज करें और अब जब सबसे बड़ा बाहरी वेरिएबल हल हो गया है, तो मल्टी-ईयर एक्सपोर्ट-आधारित कमाई साइकिल के लिए पोजीशन बनाएं।

More From GoodReturns

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+