Why India restrict US corn: भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड निगोशिएशन विवाद की स्थिति में हैं। ऐसे में जेनेटिकली मोडिफाइड (GM) फसलें चर्चा का एक प्रमुख मुद्दा बनकर उभरी हैं। हालांकि कई देशों में GM बीजों की व्यापक रूप से खेती की जाती है और इनके कोई प्रतिकूल प्रभाव सामने नहीं आए हैं। फिर भी भारत ने इनके कमर्शियल यूज को लेकर सतर्कता बरती है।

आखिर GMO बीज और प्रोडक्ट क्या हैं? भारत इनके व्यापक यूज पर बैन क्यों लगाता है? अमेरिका भारत के बाजार में क्यों दिलचस्पी रखता है? इनसे जुड़े लाभ और जोखिम क्या हैं?
भारत अमेरिका से मक्के के आयात पर बैन क्यों लगाया है?
- भारत मक्के के आयात की अनुमति नहीं देता क्योंकि अमेरिका में उत्पादित सभी मक्के/मक्का जेनेटिक रूप से मॉडिफाइड होते हैं।
- एक और कारण यह है कि भारत अमेरिका से आयातित GM मक्के पर उच्च शुल्क लगाता है।
- भारत सरकार मक्के के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करती है, जो अमेरिकी मक्के के अंतर्राष्ट्रीय बाजार मूल्य से काफी ज्यादा है। अनियंत्रित, सस्ते आयात की अनुमति देने से घरेलू बाजार में उथल-पुथल मच जाएगी और लाखों छोटे किसानों की आजीविका पर बुरा असर पड़ेगा।
अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने हाल ही में भारत पर अमेरिका के लिए अपना बाजार न खोलने के लिए सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि भारत में 1.4 अरब लोग अमेरिका से मक्के की केवल एक खेप क्यों खरीदते हैं?
इसके अलावा, इस साल जनवरी से चीन ने अमेरिका से अपने मक्का आयात में अधिकांश कटौती कर दी है, क्योंकि दोनों देशों के बीच व्यापार युद्ध चल रहा है, जिसके कारण अमेरिका को मक्का बेचने के लिए भारतीय बाजार पर ध्यान केंद्रित करना पड़ा है।
भारत का मक्का आयात
वित्तीय वर्ष 2024-25 में, भारत का मक्का आयात रिकॉर्ड 9.7 लाख टन तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में छह गुना बढ़ोतरी है। यह मुख्य रूप से इथेनॉल प्रोडक्शन और पशुधन चारे की बढ़ती मांग के कारण हुआ है।
अमेरिका से आयात में एक बड़ी बाधा भारत में GM खाद्य फसलों पर बैन है। अनुमान है कि 94% अमेरिकी मक्का जेनेटिक रूप से संशोधित है। इसलिए यह भारतीय बाजार के लिए काफी हद तक बेकार है। इसके अलावा भारत मक्का आयात के लिए दो-स्तरीय टैरिफ दर कोटा (TRQ) सिस्टम का यूज करता है।
इन नीतियों के कारण भारत ज्यादा उन देशों से मक्का आयात करता है जो गैर-जीएम किस्मों का निर्यात करते हैं और जिनके शुल्क व्यवस्थाएं अनुकूल हैं। म्यांमार, यूक्रेन, दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों से मक्का आयात करता है।
भारत का मक्का आयात निर्यात
वित्तीय वर्ष 2023-24 में, भारत का मक्का निर्यात घटकर 1.44 मिलियन मीट्रिक टन (MT) रह गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 58% की गिरावट है। इसके परिणामस्वरूप निर्यात मात्रा चार सालों के निचले स्तर पर पहुंच गई।
निर्यात में समग्र गिरावट के बावजूद, भारत अभी भी अपने मक्का और संबंधित उत्पादों को मुख्य रूप से दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया के देशों को भेजता है। बांग्लादेश, वियतनाम, नेपाल, मलेशिया और श्रीलंका जैसे देशों में निर्यात करता है।
GOM बीजों के यूज पर तर्क क्या हैं?
GM फ्री भारत आंदोलन, किसानों, पर्यावरणविदों और कार्यकर्ताओं का एक गठबंधन, भारत में GOM बीजों के विकास, वितरण और आयात के खिलाफ अभियान चलाता है। इस आंदोलन का तर्क है कि जीएम फसलें और जीएम प्रोडक्शन मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण और किसानों के अधिकारों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। इस साल जुलाई में, देश में जीएम बीजों के यूज का विरोध करने वाले गैर-सरकारी संगठनों ने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) को खेतों में जीएम मक्का/मक्का पर शोध जारी रखने से रोक दिया था।
GMO बीज क्या हैं?
GOM बीज ऐसे पौधे या जीव होते हैं जिन्हें आवश्यक बदलाव लाने के लिए DNA या जीन स्तर पर ऑगमेंटेड किया जाता है। नीति आयोग ने अपनी 2024 की रिपोर्ट 'आत्मनिर्भरता के लक्ष्य की ओर खाद्य तेल के विकास में तेजी लाने के मार्ग और रणनीति' में उल्लेख किया है कि
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार- GMO को ऐसे जीवों (मतलब पौधों, जानवरों या सूक्ष्मजीवों) के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जिनके जेनेटिक मैटेरियल (डीएनए) में इस तरह से बदलाव किया गया है जो नेचुरल रीकंबीनेशन द्वारा स्वाभाविक रूप से नहीं होता है।
जिस तरह मनुष्यों ने अपने कार्य जीवन में AI और अपनी दैनिक दिनचर्या में डिजिटल लेन-देन को अपनाया है, उसी तरह इस तकनीक को दुनिया भर में कृषि में व्यापक रूप से स्वीकार किया गया है और इसे अक्सर "मॉडर्न टेक्नोलॉजी" या "जीन टेक्नोलॉजी" कहा जाता है।
ये बदलाव जीन स्तर पर फसल की पैदावार बढ़ाने, कीट और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, सूखा सहनशीलता बढ़ाने, पोषण मूल्य बढ़ाने और शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए किए जाते हैं।
क्या भारत के पास अपने GOM बीज हैं?
एक ओर भारत खाद्य तेल जैसे आयातित GM प्रोडक्ट का बड़ी मात्रा में यूज करता है। वहीं दूसरी ओर भारत कृषि में उश बीजों की अनुमति नहीं देता और यहां कड़े कानून और प्रक्रियाएं हैं। हालांकि, भारत केवल 2002 में शुरू की गई बीटी कपास की व्यावसायिक खेती की अनुमति देता है। यह जेनेटिक रूप से मोडरेट बीज कीटों का बैन करता है।
साल 2014 में, भारत की जेनेटिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति (जीईएसी) ने जीएम सोयाबीन तेल जैसे तेलों के आयात को हरी झंडी दे दी थी, जो देश को ब्राजील, अर्जेंटीना और रूस से मिलता है, जिसका यूज अधिकांश भारतीय खाना पकाने में करते हैं, और इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं बताया गया है।
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