नई दिल्ली। चीन के साथ सीमा पर विवाद बढ़ने के दौरान भारत की जानकारी में कई नई बातें सामने आई हैं। इसमें सबसे बड़ी जानकारी यह है कि भारत से 7 गुना ज्यादा वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगता है चीन। यही नहीं भारत एशिया में सबसे कम वस्तुओं पर टैरिफ लगाना वाला देश है। इस जानकारी के सामने आते ही अब मोदी सरकार ने चीन से आयात होने वाली वस्तुओं की नए सिरे से लिस्ट तैयार करने में जुट गई है। बाद में इन वस्तुओं के आयात पर ऐसे नियम जारी किए जाएंगे कि इनसे भारत के कारोबारियों को कोई नुकसान न हो।
फिलहाल ये है स्थिति
इस जानकारी के अनुसार चीन ने लगभग आर्थिक मोर्चे पर भी भारत के खिलाफ युद्ध जैसा माहौल बना रखा है। चीन 2,848 वस्तुओं पर नॉन-टैरिफ बैरियर लगाता है। इसके चलते ये वस्तुएं चीन नहीं भेजी जा सकतीं। वहीं भारत में 433 वस्तुओं के आयात पर ही बैरियर हैं। यानी इतनी वस्तुए भारत में लाना कठिन है। जानकारों के मुताबिक, विश्व व्यापार संगठन के नियमाें की वजह से कोई भी देश तय दर से अधिक टैरिफ नहीं लगा सकता। आयात कम करने के लिए ज्यादातर देश 2 तरह के नॉन टैरिफ बैरियर लगाते हैं।
एशिया में क्या है हालात
हालांकि भारत की छवि ऐसी बना दी गई है कि वह दुनिया में सबसे ज्यादा टैरिफ लगाने वाला देश है। हालांकि जब भारत के रिकॉर्ड खोजे गए तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। दरअसल भारत एशिया में सबसे कम टैरिफ लगाने वाला देश है। वहीं चीन सबसे ज्यादा टैरिफ लगाने वाले देशों की सूची में टॉप पर है। इस जानकारी के अनुसार चीन सबसे ज्यादा 2848 वस्तुओं पर आयात टैरिफ लगाता है। इसके बाद दक्षिण कोरिया का नंबर है। यह देश 1813 वस्तुओं पर टैरिफ लगाता है। वहीं जापान 1671 वस्तुओं पर टैरिफ लगाता है। इसके बाद थाइलैंड का नंबर आता है। थाइलैंड 1169 वस्तुओं पर टैरिफ लगाता है। वहीं भारत केवल 433 वस्तुओं पर टैरिफ लगाता है। इस प्रकार भारत एशिया में सबसे वस्तुओं पर टैरिफ लगाने वाला देश है।
चीन सहित इन देशों पर लगाई एंटी डम्पिंग ड्यूटी
भारत ने हाल ही में चीन, वियतनाम और कोरिया से स्टील के कुछ उत्पादों के आयात पर एंटी डम्पिंग ड्यूटी लगाई है। इसका मकसद इन देशों से हो रहे सस्ते आयात से घरेलू निर्माताओं की सुरक्षा करना था। तीनों देशों से आने वाले स्टील के फ्लैट रोल्ड प्रोडक्ट, एल्युमिनियम और जिंक की कोटिंग वाले रोल पर 5 साल के लिए एंटी डम्पिंग ड्यूटी लगाई गई है। इसकी रेंज 13.07 डॉलर प्रति टन से लेकर 173.1 डॉलर प्रति टन तक है। वाणिज्य मंत्रालय की जांच विंग डीजीटीआर ने जांच में पाया था कि तीनों देश इन उत्पादों को बेहद कम दाम में भारत भेज रहे हैं। इस तरह होने वाली डम्पिंग से घरेलू निर्माताओं के हित प्रभावित हो रहे हैं। वैश्विक व्यापार के नियमों के अनुसार घरेलू निर्माताओं को बराबरी का मौका उपलब्ध करवाने के लिए कोई भी देश ऐसे उत्पादों पर एंटी डम्पिंग ड्यूटी लगा सकता है।
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