नई दिल्ली। भारत की जीडीपी में चालू वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही में साढ़े सात फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है। इस प्रकार से भारत की अर्थव्यवस्था मंदी के दौर में आ गई है। तकनीकी रूप से कहा जाता है कि अगर दो तिमाहियों में अर्थव्यवस्था निगेटिव रहे तो उस अर्थव्यव्स्था को मंदी में कहा जाता है। पहली तिमाही में भारत की जीडीपी में 23.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। यह जानकारी सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने एक बयान में यह जानकारी दी।

अनुमान से अच्छी बढ़ी है अर्थव्यवस्था
आंकड़ों को अगर देखा जाए तो जीडीपी में 7.5 फीसदी की गिरावट दूसरी तिमाही में दर्ज हुई है। लेकिन यह रेटिंग एजेंसियों सहित आरबीआई के अनुमानों से भी अच्छी बढ़ी है। अगर यही ट्रेंड जारी रहा तो चालू वित्तीय वर्ष के अंत तक जीडीपी का नुकसान काफी कम हो सकता है।
ये हैं आंकड़े
भारत की जीडीपी चालू वित्तीय वर्ष 2020-21 की दूसरी तिमाही में 33.14 लाख करोड़ रुपये की रही है। जबकि पिछले साल की दूसरी तिमाही में यह जीडीपी 35.84 लाख करोड़ रुपये रही थी। इस प्रकार इसमें साढ़े सात फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है। वहीं पिछले वर्ष जीडीपी में दूसरी तिमाही में 4.4 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई थी।
ये हैं जीडीपी को सहारा देने वाले क्षेत्र
माना जा रहा था कि निर्माण क्षेत्र इस बार जीडीपी को झटका देगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर इस बार 0.4 फीसदी की दर से बढ़ा है। पहली तिमाही में इस सेक्टर में 39 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई थी। वहीं बिजली क्षेत्र में भी 4.4 फीसदी की तेजी दर्ज हुई है। इसके अलावा कृषि क्षेत्र में 3 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज हुई है।
सेक्टर के हिसाब से जीडीपी नंबर
बढ़ने वाले सेक्टर
-कृषि: 3.4 फीसदी
-मैन्युफैक्चरिंग : 0.6 फीसदी
-इलेक्ट्रिसिटी : 4.4 फीसदी
गिरावट वाले सेक्टर
-माइनिंग: -9.1 फीसदी
-इलेक्ट्रिसिटी : 4.4 फीसदी
-कंस्ट्रक्शन : -8.6 फीसदी
-ट्रेड एवं होटल्स : -15.6 फीसदी
-फाइनेंस, इंश्योरेंस एवं रियल्टी : -8.1 फीसदी
पब्लिक एडमिन, डिफेंस : -12.2 फीसदी
जानिए रेटिंग एजेंसियों के क्या थे अनुमान
जीडीपी को लेकर आईबीआई सहित कई रेटिंग एजेंसियों ने अनुमान जारी किया था। आरबीआई का अनुमान था कि जीडीपी में 8.6 फीसदी की गिरावट आएगी। वहीं मूडीज ने 10.6 फीसदी, केयर रेटिंग ने 9.9 फीसदी, क्रिसिल ने 12 फीसदी, इक्रा ने 9.5 फीसदी और एसबीआई रिसर्च ने 10.7 फीसदी की गिरावट का अनुमान जताया था। जिन सेक्टर्स में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद जताई गई थी उनमें कृषि, बैंकिग एवं फाइनेंस और सर्विस सेक्टर को बताया गया था, वहीं मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन में गिरावट का अनुमान जताया गया था।
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