मंगलवार को जारी एसबीआई के आर्थिक अनुसंधान विभाग की एक रिसर्च रिपोर्ट में देश की जीडीपी ग्रोथ अनुमान में भारी कटौती की गई है।
नई दिल्ली: मंगलवार को जारी एसबीआई के आर्थिक अनुसंधान विभाग की एक रिसर्च रिपोर्ट में देश की जीडीपी ग्रोथ अनुमान में भारी कटौती की गई है। जी हां देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने रिपोर्ट जारी करके मौजूदा वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 4.2 फीसदी जीडीपी ग्रोथ रेट का अनुमान लगाया है। इसके साथ ही वित्त वर्ष 2019-20 के लिए विकास दर का अनुमान 6.1 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया है। इसके लिए बैंक ने ऑटोमोबाइल की घटती सेल, एयर ट्रैफिक मूवमेंट में गिरावट, कोर सेक्टर ग्रोथ सुस्त पड़ना और कंस्ट्रक्शन व इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में गिरावट को जिम्मेदार ठहराया है।

ग्रोथ रेट का अनुमान कई संस्थाएं कम कर चुकी
जानकारी दें कि एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी), वर्ल्ड बैंक (डब्लूओ), ऑर्गेनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (ओसीईडी), भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और अंतरराष्ट्रीय मॉनिटरी फंड (आईएफएफ) जैसी संस्थाएं भी चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े कम कर चुकी हैं। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारतीय जीडीपी छह साल के सबसे निचले स्तर 5 फीसदी पर थी।
दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 4.2 फीसदी रहने का अनुमान
अपनी रिपोर्ट में एसबीआई ने कहा कि दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 4.2 फीसदी रहने का अनुमान है। वहीं एसबीआई ने कहा कि फैक्ट्री आउटपुट आठ साल के निचले स्तर पर होना खतरे की स्थिति है। इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (आईआईपी) सितंबर माह के लिए -4.3 फीसदी पर रहा। एसबीआई ने रिपोर्ट में यह भी कहा कि इस बात की उम्मीद की जा रही है कि जीडीपी में स्लोडाउन को देखते हुए रिजर्व बैंक दिसंबर में मॉनिटरी पॉलिसी में रेट कम कर सकता है।
रिपोर्ट में एसबीआई ने पॉलिसी सरप्राइसेज के बारे में सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि, इस वक्त जरूरी है कि सरकार टेलीकॉम, पॉवर और एनबीएफसी सेक्टरों में कोई नेगेटिव पॉलिसी लागू न करे। उदाहरण के लिए, यह जरूरी है कि एनबीएफसी सेक्टर के लिए प्रभावशाली उपाय किया जाए, जिसे लंबे समय से टाला जा रहा है।


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