India CPI Inflation: जनवरी 2026 में भारत की रिटेल महंगाई दर घटकर 2.75 परसेंट हो गई, क्योंकि सरकार ने 2024 को नया बेस ईयर मानकर एक नई कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) सीरीज शुरू की, जो एक दशक से ज्यादा समय में महंगाई के पैमाने में बड़े बदलाव को दिखाता है।

मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन (MoSPI) ने जो डेटा जारी किया, उससे पता चला कि जनवरी में नए CPI के आधार पर साल-दर-साल महंगाई 2.75% रही, जिसमें ग्रामीण महंगाई 2.73% और शहरी महंगाई 2.77% रही। कंज्यूमर फूड प्राइस इंडेक्स (CFPI) से मापी गई फूड इन्फ्लेशन 2.13% कम हुई।
दिसंबर में, भारत की रिटेल महंगाई दर तीन महीने के सबसे ऊंचे लेवल 1.33 परसेंट के करीब थी। महंगाई में यह बढ़ोतरी किचन की जरूरी चीजों जैसे सब्जियों और प्रोटीन वाली चीज़ों की ज्यादा कीमतों की वजह से हुई।
नवंबर में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) से मापी गई महंगाई दर 0.71% थी, जो महीने के दौरान काफी तेजी दिखाती है। पिछली बार रिटेल महंगाई सितंबर 2025 में ज्यादा थी, जब यह 1.44% तक पहुंची थी।
हेडलाइन महंगाई बढ़ने के बावजूद, खाने की महंगाई लगातार सातवें महीने नेगेटिव रही, जो कुल खाने की कीमतों में लगातार नरमी को दिखाता है। दिसंबर में खाने की महंगाई -2.71% रही, हालांकि यह नवंबर में -3.91% से कम हुई, जिससे पता चलता है कि कुछ खाने की चीजों की कीमतों में धीरे-धीरे तेजी आ रही है।
नया CPI इन्फ्लेशन बेस इफेक्ट
भारत के CPI इन्फ्लेशन डेटा रिलीज के साथ एक बड़ा बदलाव भी लागू हुआ है। नए CPI इन्फ्लेशन में एक नया बेस ईयर शामिल होगा, यानी 2012 के बजाय 2024। नया CPI इन्फ्लेशन फॉर्मूला सिर्फ खाने और फ्यूल की कीमतों को ही ट्रैक नहीं करेगा, बल्कि इसमें ऑनलाइन शॉपिंग, OTT सब्सक्रिप्शन और हवाई किराए जैसे आजकल के खर्चे भी शामिल होंगे। इन बदलावों का इंटरेस्ट रेट, EMI और पूरी मॉनेटरी पॉलिसी पर बड़ा असर पड़ सकता है।
CPI महंगाई के लिए बेस ईयर 2012 से बदलकर 2024 कर दिया गया है। इसका मतलब है कि महंगाई को आज की कीमतों (आम चीजों और सेवाओं की) की तुलना 2024 की कीमतों से करके मापा जाएगा।
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