India-US Trade: भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर से बढ़ सकता है। भारत ने अमेरिका से आने वाले कुछ खास प्रोडक्ट्स पर अतिरिक्त आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का प्रस्ताव तैयार किया है।
यह कदम अमेरिका द्वारा भारतीय स्टील और एल्युमिनियम पर लगाए गए भारी टैरिफ के जवाब में उठाया जा रहा है। भारत ने इस प्रस्ताव की जानकारी विश्व व्यापार संगठन (WTO) को भी दी है।

क्या है पूरा मामला?
2018 में अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए स्टील और एल्युमिनियम के आयात पर क्रमशः 25% और 10% का आयात शुल्क लगा दिया था। इस फैसले से भारत समेत कई देशों को नुकसान हुआ। भारत का दावा है कि इन टैरिफ की वजह से उसके स्टील और एल्युमिनियम प्रोडक्ट्स का निर्यात प्रभावित हुआ है।
अब भारत ने WTO में कहा है कि वह अमेरिका से आने वाले 29 वस्तुओं पर जवाबी टैरिफ लगाने की योजना बना रहा है। इनमें फल, केमिकल प्रोडक्टस और कुछ धातुएं शामिल हैं।
किन वस्तुओं पर लग सकता है टैक्स?
भारत जिन अमेरिकी प्रोडक्टस पर टैरिफ बढ़ाना चाहता है, उनमें शामिल हैं:
सेब
बादाम
नाशपाती
बोरिक एसिड
एंटी-फ्रीजिंग पदार्थ
लोहे और स्टील से बने प्रोडक्टस
इन वस्तुओं का भारत में आयात काफी मात्रा में होता है और इन पर टैरिफ बढ़ने से अमेरिकी व्यापार पर असर पड़ सकता है।
कितना नुकसान हुआ भारत को?
भारत ने WTO को यह भी बताया कि अमेरिका के इस कदम से करीब 7.6 अरब डॉलर के व्यापार पर असर पड़ा है। भारत का अनुमान है कि उसे करीब 1.91 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है। भारत का कहना है कि यह टैरिफ सुरक्षा उपायों के नाम पर लगाया गया, लेकिन वास्तव में यह अनुचित और व्यापार विरोधी है।
अमेरिका ने फिर बढ़ाया टैरिफ
अमेरिका ने न केवल 2018 में टैरिफ लागू किया बल्कि 10 फरवरी 2025 को उसने इन नियमों में और संशोधन कर दिए जिससे भारतीय प्रोडक्टस पर और असर पड़ा। इन नए संशोधनों ने भारत के लिए अमेरिका को स्टील और एल्युमिनियम प्रोडक्ट्स निर्यात करना और मुश्किल बना दिया।
WTO की जानकारी के बिना फैसला
भारत ने यह भी आरोप लगाया है कि अमेरिका ने अपने सुरक्षा उपायों के तहत जो बदलाव किए उसकी जानकारी WTO की सुरक्षा समिति को नहीं दी। WTO के नियमों के मुताबिक इस तरह के किसी भी फैसले की जानकारी संबंधित देशों और संगठन को देना जरूरी होता है। भारत ने अब WTO के नियमों के अनुसार अमेरिका से बातचीत की औपचारिक मांग की है ताकि इस विवाद का हल निकाला जा सके।
अमेरिका ने क्या कहा है?
अमेरिका का कहना है कि स्टील और एल्युमिनियम प्रोडक्टस का ज्यादा आयात उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। इसलिए इन पर टैरिफ लगाना जरूरी था। यह वही तर्क है जो अमेरिका ने पहले यूरोपीय यूनियन को भी दिया था जब उन्होंने WTO में इसी तरह की आपत्ति दर्ज की थी।
भारत ने एक मजबूत मेसेज दिया है कि वह अपने व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए सख्त कदम उठाने को तैयार है। अमेरिका के टैरिफ का जवाब जवाबी टैरिफ से देने की भारत की रणनीति यह दिखाती है कि वैश्विक व्यापार अब सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक मुद्दा बन चुका है। आने वाले समय में WTO में यह मामला चर्चा का बड़ा विषय बन सकता है।
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