India-Pakistan Tension: भारत और पाकिस्तान के बीच हाल ही में बढ़ा तनाव सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं है, इसका असर अब दोनों देशों की आर्थिक सेहत पर भी पड़ने की संभावना जताई जा रही है। S&P ग्लोबल अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने अपने नए बयान में इस मुद्दे पर चिंता का व्यक्त किया है।

तनाव का असर कर्ज पर भी पड़ सकता है
भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूदा हालात के बीच S&P ने कहा है अगर ये चीज लंबे समय तक बनी रही, तो इससे दोनों देशों के लोन चुकाने की कैपेबिलिटी पर खराब असर देखने को मिल सकता है। यह असर खासतौर पर अंतरराष्ट्रीय उधारी (external borrowing) पर दिखाई दे सकता है, जहां निवेशक किसी देश की राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता को देखते हुए अपना पैसा लगाते हैं।
फिलहाल कोई बड़ा खतरा नहीं, लेकिन हालात नाजुक
रेटिंग एजेंसी का मानना है कि अभी की स्थिति में दोनों देशों की रेटिंग्स पर सीधा असर नहीं पड़ा है। भारत को जहां 'BBB-' रेटिंग दी गई है, वहीं पाकिस्तान को 'CCC+' के साथ स्टेबल आउटलुक मिला हुआ है। लेकिन अगर अगले कुछ हफ्तों में स्थिति शांत नहीं हुई और सैन्य गतिविधियों में बढ़ोतरी हुई, तो यह रेटिंग्स कमजोर पड़ सकती हैं।
गलतफहमी से बढ़ सकता है संघर्ष
S&P ने चेतावनी देते हुआ कहा कि सीमा पर किसी भी तरह की झड़प या गलत अनुमान बड़ी लड़ाई की ओर ले जा सकती है। ऐसा होने पर दोनों देशों को कर्ज की स्थिति बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि रक्षा खर्च बढ़ने से बजट पर दबाव पड़ेगा और विकास कार्यों में कटौती करनी पड़ सकती है।
भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत पर निवेश पर असर पड़ सकता है
एजेंसी ने भारत की आर्थिक नींव को मजबूत बताया है। उनका कहना है कि भारत की ग्रोथ बनी रहेगी और राजकोषीय घाटा भी धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। लेकिन अगर तनाव बढ़ता है तो इससे विदेशी निवेश पर असर पड़ सकता है, जो भारत की ग्रोथ को सपोर्ट करता है। वैश्विक कंपनियां ऐसे समय में निवेश से पीछे हट सकती हैं, जब उन्हें सप्लाई चेन स्थिरता की तलाश हो।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था सुधार के रास्ते पर लेकिन संवेदनशील
पाकिस्तान की सरकार आर्थिक सुधारों पर काम कर रही है। हाल ही में कुछ सकारात्मक संकेत भी मिले हैं, लेकिन यदि सैन्य खर्च बढ़ता है तो इन सुधारों की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही बाहरी कर्ज और घाटे के दबाव में है, ऐसे में किसी भी तरह का तनाव उसकी स्थिति को और कमजोर बना सकता है।
दोनों देशों के लिए नहीं है लंबे संघर्ष का फायदा
S&P ने साफ कहा है कि भारत और पाकिस्तान दोनों के पास लंबे समय तक सैन्य तनाव बनाए रखने की गुंजाइश नहीं है। एक तरफ भारत को वैश्विक निवेश आकर्षित करना है, वहीं पाकिस्तान को अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर करना है। दोनों ही लक्ष्य तभी पूरे हो सकते हैं जब सीमाओं पर शांति और स्थिरता बनी रहे।
शांति और बातचीत ही आगे का रास्ता
S&P की यह रिपोर्ट इस बात की ओर इशारा करती है कि क्षेत्रीय तनाव सिर्फ सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रहता, उसका असर आम आदमी की जेब और देश की विकास योजनाओं पर भी पड़ता है। ऐसे में दोनों देशों की सरकारों को मिल-बैठकर शांति से इस तनाव का हल निकालना चाहिए। आर्थिक स्थिरता के लिए यह कदम न सिर्फ जरूरी है, बल्कि जरूरी बन गया है।


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