India Pakistan Tension: भारत ने पाकिस्तान को दी जा रही अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मदद पर सवाल उठाए हैं। सरकार और विशेषज्ञों का मानना है कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश को बिना जवाबदेही के आर्थिक सहायता देना पूरे क्षेत्र की शांति के लिए खतरा बन सकता है।

आर्थिक मदद लेकिन किस कीमत पर?
पाकिस्तान को IMF से मिलने वाली मदद को लेकर भारत की चिंता सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक भी है। भारत का कहना है कि आतंकी गतिविधियों में लिप्त सरकार या सैन्य तंत्र को मिलने वाली आर्थिक सहायता अंततः उन्हीं गतिविधियों को मजबूत कर सकती है। यह वैसा ही है जैसे किसी घायल को दवा देना जबकि उसके हाथ में बंदूक हो।
शर्तों के साथ आता है IMF का पैसा
IMF यानी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जब किसी देश को आर्थिक सहायता देता है, तो उसमें कई आर्थिक सुधारों की शर्तें होती हैं। लेकिन भारत के अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इन शर्तों में आतंकवाद या सैन्य खर्च पर नियंत्रण जैसी बातें शामिल नहीं होतीं। यह एक बहुत बड़ी चूक मानी जा रही है।
ईकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रणब सेन ने एक बयान में कहा कि IMF की मदद तब दी जाती है जब कोई देश उसके बताए गए आर्थिक नियमों को मानता है। लेकिन अगर उन शर्तों में सुरक्षा और आतंकी गतिविधियों पर रोक का कोई जिक्र नहीं है, तो यह अधूरी प्रक्रिया है।
अमेरिका की भूमिका सबसे अहम
IMF में अमेरिका का बड़ा प्रभाव होता है। भारत का मानना है कि अमेरिका अगर पाकिस्तान को चीन के करीब देखता है, तो वह आर्थिक मदद को लेकर सख्ती बरतेगा। लेकिन अगर राजनीतिक फायदे के लिए उसे सहयोगी मानता है, तो मदद मिलती रहेगी, भले ही आतंकी गतिविधियां चलती रहें।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की हालत खराब
पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति लगातार गिरती रही है। विदेशी कर्ज, महंगाई, गिरता रुपया और घटता टैक्स कलेक्शन उसकी मुख्य समस्याएं हैं। पाकिस्तानी रुपया अब भारतीय रुपये से तीन गुना कमजोर हो चुका है, और निवेशकों का भरोसा भी डगमगाया हुआ है।
G7 देशों की चुप्पी और भारत की नाराज़गी
भारत की हालिया सैन्य प्रतिक्रिया के बाद G7 देशों ने केवल संयम बरतने की अपील की। लेकिन भारत का कहना है कि सिर्फ बयानबाज़ी से आतंकवाद का हल नहीं निकलेगा। अंतरराष्ट्रीय मंचों को यह तय करना होगा कि कौन पीड़ित है और कौन हमलावर।
परमाणु हथियार और आतंकी सोच खतरनाक मेल
भारत ने पाकिस्तान की सेना को लेकर भी चिंता जताई है। सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की तरफ से बार-बार परमाणु हथियारों का जिक्र किया जाना बहुत गंभीर मसला है। भारत का कहना है कि अगर पाकिस्तान को आतंकवाद और परमाणु ताकत का साथ-साथ इस्तेमाल करने की छूट मिलती रही, तो इससे पूरे दक्षिण एशिया में स्थिरता खतरे में पड़ जाएगी।
जवाबदेही ज़रूरी है
भारत यह साफ करना चाहता है कि IMF जैसी संस्थाओं को सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और सुरक्षा पहलुओं को भी ध्यान में रखना चाहिए। आर्थिक मदद के बदले पाकिस्तान को जवाबदेह बनाना ज़रूरी है, वरना इस राहत पैकेज की कीमत पूरी दुनिया को चुकानी पड़ सकती है।


Click it and Unblock the Notifications