नई दिल्ली। कोरोना वायरस के चलते दुनियाभर में आर्थिक गतिविधियां ठप सी हो गई हैं। इसका असर कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल पर पड़ रहा है। क्रूड ऑयल का रेट लगातार गिरता जा रहा है। स्थिति तो यह है कि दो महीने पहले 75 डॉलर प्रति बैरल पर बिकने वाला क्रूड ऑयल इस वक्त 25 डॉलर के आसपास आ गया है। इससे जहां कच्चा तेल बेचने वो देशों को नुकसान हो रहा है, वहीं भारत जैसे कच्चे तेल के बड़े आयातक देशों को फायदा हो रहा है। कोरोना संकट से निपटने के लिए सरकार ने जहां करीब करीब 2 लाख करोड़ रुपये का राहत पैकेज जारी किया है, वहीं अनुमान है कि सरकार को तेल से ही करीब 2 लाख करोड़ रुपये का फायदा हो सकता है। आइये जानते हैं कि क्या है पूरा मामला।
लॉकडाउन घटाएगा कच्चे तेल का आयात बिल
जानकारों का मानना है कि अगर 21 दिन के इस लॉकडाउन को बढ़ाया जाता है और यह करीब 3 महीने तक जारी रहता है, तो सरकार के करीब 2 लाख करोड़ रुपये बचेंगे। वजह है ऑयल इंपोर्ट बिल में बड़ी कमी आएगी। लंबे समय तक लॉकडाउन के कारण आयात बिल में 30 पर्सेंट तक की कमी आने की उम्मीद है।
देश के 78 हजार पेट्रोल पंपों में पसरा है सन्नाटा
देश में करीब 78 हजार पेट्रोल पंप हैं। सामान्य दिनों में औसतन 10 करोड़ लीटर पेट्रोल की बिक्री की जाती है। इसके अलावा करीब 32 करोड़ लीटर डीजल की बिक्री होती है। इतनी बड़ी खपत वाले देश में 80 पर्सेंट से ज्यादा आयात पर निर्भरता है। ऐसे समय में जब मांग घटकर एक तिहाई से कम रह गई है, तो जाहिर है कि आयात बिल भी काफी घट जाएगा। मांग में कमी के चलते आजकल पेट्रोल पंप पर सन्नता पसरा हुआ है।
ये है फायदे का गणित
जानकारों के अनुसार आयात बिल में इतनी कमी से सरकार को करीब 2 लाख करोड़ रुपये की बचत हो सकती है। वित्त वर्ष 2018-19 में इंपोर्ट बिल करीब 7.8 लाख करोड़ रुपये का था। लॉकडाउन की वजह से इस साल करीब 2 लाख करोड़ रुपये कम रह सकता है। यानी सीधे-सीधे सरकरा को 2 लाख करोड़ रुपये की बचत हो सकती है।
हालांकि कम बिक्री से टैक्स भी कम मिलेगा
लॉकडाउन की वजह से मांग घटने के कारण सरकार को एक्साइज ड्यूटी का भी नुकसान हो रहा है। हाल में पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई गई थी, लेकिन जब मांग ही नहीं है। पेट्रोलियम पदार्थों की बिक्री करीब 80-90 पर्सेंट घट चुकी है। ऐसे में जाहिर है कि एक्साइज ड्यूटी का भी सरकार को नुकसान हो रहा है। सामान्य दिनों की मांग के हिसाब से फिलहाल सरकार को रोज पेट्रोल पर करीब 206 करोड़ रुपये का और डीजल पर 550 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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