
India : जब पूरा विश्व अर्थव्यवस्था की परेशानीयों से गुजरता दिख रहा हैं। उस समय अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) जैसी जो दिग्गज वैश्विक संस्था है। इन संस्थाओं को भारत आर्थिक वृद्धि के क्षेत्र में एक शानदार स्थान के रुप में दिखाई दे रहा है। इस बात का साल 2022 गवाह बना। इस साल 2022 में भारत ने ब्रिटेन को पछाड़ दिया और भारत दुनिया का चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल कर लिया और यह सब सकार हुआ है। वो एक दम से नहीं हुआ है। पिछले कुछ सालों में देश ने टैक्स और जो बैंकिंग सेक्टर हैं। इनमें काफी बड़े बदलावो को अंजाम दिया है। इसका जो लाभ है। आम जनता को मिल रहा है। अब भारत की जो विकास यात्रा है। इसको दुनिया उम्मीद के नजरो से देख रही हैं।
भारत बना दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था ब्रिटेन को पछाड़कर
भारत काफी तेजी से तरक्की कर रहा है। इसका एक बहुत बड़ा गवाह 2022 भी है। इसी वर्ष यानी वर्ष 2022 के सितंबर के महीने में आईएमएफ को एक रिपोर्ट आई है। जो जोश बढ़ाने वाली है। आईएमएफ की रिपोर्ट के अनुसार,भारत दुनिया की चौथी अर्थव्यवस्था बन गया है।
देश ने इस मुकाम पर पहुंचने के लिए ब्रिटेन को पीछे छोड़ा है। अब भारत के आगे सिर्फ भारत से आगे अब केवल अमेरिका, चीन, जापान और जर्मनी हैं।
विश्व की हालत खस्ता
जानकारों का मानना है। कि विश्व स्तर पर आर्थिक हालत उनकी नीतियों की कारण से खस्ताहाल होती जा रही है। खास तौर पर अमेरिका और यूरोप की आर्थिक हालत उनकी नीतियों की वजह से खस्ताहाल होती जा रही है। यूक्रेन और रूस में युद्ध चल रहा है। इसकी वजह से सस्ते ईंधन की सप्लाई पर रोक लगी है। पहले कोरोना की वजह से और अब इस युद्ध ने कुल मिलाकर अधिक वक्त से वह को जो आर्थिक स्थिति है उसको काफी खराब करना शुरू कर दिया था। इसका सीधा असर काफी चीजों पर पड़ा है। जैसे ट्रांसपोर्ट, जरूरी सामानों के उत्पादन, कृषि उत्पादों और बिजली उत्पादन पर पड़ता दिखाई दिया है।
वृद्धि अनुमान दर आईएमएफ का
देश वर्ष 2022-23 में भारत 6.8 6.1, चीन 3.2 4.4, अमेरिका 1.5 01, जर्मनी 1.5 -0.3, जापान 1.7 1.6, ब्रिटेन 3.6 0.3, फ्रांस 2.5 0.7, रूस -3.4 -2.3 यह जो वृद्धि दर है। यह प्रतिशत में है। यह समय अक्टूबर 2022 का है।
असर देश की नीति का
देश की आर्थिक नीतियां ऐसी है। कि जिससे उसने अपनी महंगाई पर पूरे विश्व के मुकाबले पर काबू कर पाया है। पिछले कुछ महीने के जो आंकड़े है। जो आंकड़े बताते है कि महंगाई रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के कंफर्ट जोन के भीतर है। इसके कारण आने वाला जो समय लोन को महंगे करने की जो स्पीड है। इसमें ब्रेक लग सकती है।
आर्थिक सुधारों से हुआ फायदा
भारत में पिछले कुछ सालों के आर्थिक फैसलों का यह परिणाम रहा है कि आर्थिक रफ्तार भी बढ़ी है। मिशन मेक इन इंडिया रहा हो या फिर डिजिटल इंडिया और स्किल इंडिया इन सभी ने मिलकर एक ऐसा कारोबारी माहौल बनाया। जिसमें भारतीय उत्पादों को न केवल बड़ा बाजार मिला। बल्कि वैश्विक पहचान भी मिली है।
कारगर रहा आत्मनिर्भर का मंत्र
कोरोना महामारी के समय सरकार की तरफ से देश को जो विदेशी उत्पाद है। उन उत्पादों से आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लिया है। इसके लिए प्रोत्साहन स्कीम का ऐलान किया है। यह स्कीम उत्पादन आधारित प्रोत्साहन स्कीम हैं। इसमें कई सारे ऐसे क्षेत्र है। जिनमें उत्पादन शुरू हो चुका है और अभी कुछ क्षेत्र है। जो योजना के स्तर पर हैं। आने वाले समय में यह जो पहल है। अपने पूरे जोर के साथ काम करेगी।
उत्पादन आधारित प्रोत्साहन इन क्षेत्रों में दिया जा रहा क्षेत्र राशि
फार्मा एवं ड्रग सेक्टर में 15 हजार करोड़ रु, आटोमोबाइल एवं आटो कंपोनेंट 57 हजार करोड़ रु, टेलीकॉम नेटवर्क एवं इंफ्रास्ट्रक्चर 12 हजार करोड़ रु, टेक्सटाइल सेक्टर 10,683 करोड़ रु, एडवांस केमिकल सेल बैटरी सेक्टर 18 हजार एक सौ करोड़ रु, सोलर फोटो वॉल्टिक सेक्टर 4 हजार 5 सौ करोड़ रु, व्हाइट गुड्स 6,238 करोड़ करोड़ रु, फूड प्रोडक्ट्स सेक्टर- 10,900 करोड़ करोड़ रु है। इन सभी क्षेत्रों में जो प्रोत्साहन दिए जा रहे है। इससे देश के भीतर रोजगार के जो नए अवसर है। वो सृजित तो होंगे ही साथ ही स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।
लक्ष्य आयात बिल घटाना
केंद्र सरकार ने देश में आत्मनिर्भर भारत की मुहिम को शुरू की है। इससे केंद्र सरकार का मुख्य लक्ष्य आयात बिल को घटाना हैं। इस मुहिम के तहत कई सारे क्षेत्रों में उत्पादन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। जैसे- रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल, मोबाइल उद्योग, दवा और चिप क्षेत्र हैं।
मदद मिलेगी विदेशी मुद्रा भंडार बचाने में
जानकारों का मानना है। कि आने वाला जो समय है। इससे न सिर्फ रोजगार के क्षेत्र में बढ़ोतरी होगी। इसके साथ ही देश का चीन जैसे देशों में जो निर्भरता है। वो भी काफी हद तक घटेगी। इतना ही नहीं इससे आयत भी काफी कम होगा और उससे जो विदेशी मुद्रा भंडार है। उसमें काफी बढ़ोतरी होगी।
नजर आयत को घटाने पर
प्रणब सेन जो पूर्व सांख्यिकीविद और आर्थिक मामलों के जानकार है। उनके अनुसार, भारत में उन्ही उत्पादों की दिशा में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कवायद जारी है। जिन क्षेत्रों में हमारा जो उत्पाद है। काफी अधिक है। सरकार की यह जो पहल है। यह काफी बेहतर है। प्रमुख तौर पर रक्षा जैसे जो रणनीतिक क्षेत्र है। अगर इसमें देश आत्मनिर्भर बनता है, तो फिर भारत की सुरक्षा मजबूत होगी। इसके साथ ही आयत घटने से जो विदेशी मुद्रा भंडार है उसमें भी काफी बचत होगी।
भारत वैश्विक आर्थिक हालात के बीच
कोरोना महामारी कम हुई। उसके बाद अमेरिकी और यूरोपीय देशों में छाई आर्थिक सुस्ती और रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद धीरे-धीरे मंदी में बदलने लगी है। इसके नुकसान के कारण पूरी दुनिया ही प्रभावित हो रहा है। लेकिन भारत जो है। कुछ मामलों में कुछ मामलों में अच्छा है। पिछले कुछ सालों में आर्थिक मामलों के कारण से कई सारी वस्तुओं के उत्पादन में भारत की क्षमता काफी शानदार है।
बढ़ते कदम मुक्त व्यापार के दिशा में
देश में लगभग 13 देश है। जिसमें मुक्त व्यापार समझौते पर सिग्नेचर किए हैं। इतना ही नहीं वही 6 तरजीही करार किए गए हैं। इसके माध्यम से देश के जो उत्पादक है। उन उत्पादकों को एक निश्चित बाजार मिलेगा यानी अगर उत्पादन को बढ़ाया जाएगा, तो फिर उसके जो निश्चित खरीददार है। वो दुनियाभर में मौजूद रहेंगे।
More From GoodReturns

भारी बारिश का अलर्ट: बाढ़ में डूबी कार को स्टार्ट न करें, क्लेम पाने का सही तरीका जानें

Manipal Health IPO: ₹9,275 करोड़ का बड़ा दांव, क्या आपको अप्लाई करना चाहिए?

ITR फाइल करने का आज आखिरी मौका: क्या आज के बाद लगेगा जुर्माना? जानें बचने का तरीका

US Fed का फैसला आज रात: क्या भारतीय बाजार में आएगी बड़ी हलचल? जानें ट्रेडर्स के लिए खास रणनीति

GST QRMP स्कीम: PMT-06 पेमेंट में 35% चालान चुनें या सेल्फ-असेसमेंट? ब्याज से बचने का पूरा गणित

ITR फाइलिंग की डेडलाइन: 31 जुलाई से पहले निपटा लें ये जरूरी काम, वरना होगा नुकसान

चेन्नई रेल अपडेट: आज रात कई ट्रेनें रद्द, सफर से पहले चेक करें अपना रूट और टाइमिंग

Russia ने 6 महीने में बेच दिया 44 टन सोना! रूस क्यों घटा रहा है अपना Gold Reserve?

SEBI के नए बायबैक नियम लागू: अब ओपन-मार्केट में निवेश से पहले जान लें ये 5 बड़े बदलाव

Indo-MIM Listing Today: आज बाजार में होगी धमाकेदार एंट्री! लिस्टिंग के बाद शेयर बेचने का सही तरीका

Gold Outlook: Buy on Dip या Sell on Rise? गोल्ड, सिल्वर और क्रूड पर Expert Strategy!



Click it and Unblock the Notifications