नई दिल्ली, जुलाई 07। वैश्विक स्तर पर भारत की अर्थव्यवस्था की गिरावट जारी है। कोरोना महामारी के वजह से अर्थव्यवस्था को झटका लगा था। महामारी के प्रभावों से भारतीय अर्थव्यवस्था ने उभरना शुरू ही किया था कि रुस-युक्रेन युद्ध ने फिर से इसकी रफ्तार पर ब्रेक लगा दी। ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट के वैश्विक डेटा के अनुसार भारत दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। कोरोना महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध से पनपे वैश्विक परिस्थिति ने भारतीय जीडीपी को नुकसान पहुंचाया है जिसके कारण भारत के सकल घरेलू उत्पाद की रैंकिंग छठे स्थान पर आ गई है। वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था अब ब्रिटेन से कम हो गई है। विश्व बैंक की पिछली रैंकिंग लिस्ट में भारत पांचवें पायदान पर था। जीडीपी के बाद हम अगर क्रय शक्ति समानता यानी की परचेजिंग पॉवर पैरिटी की बात करें तो भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के मुताबिक आपने भारत की ताजा जीडीपी और पीपीपी रैंकिंग को जाना। अब आप रहे होंगे कि आखिर इन दोनो में अंतर क्या है तो चलिए हम आपको बताते हैं कि पीपीपी और जीडीपी में क्या अन्तर है और दोनों को कैलकुलेट कैसे करते है।
GDP क्या है और इसे कैसे मेजर करते है
जीडीपी को हिंदी में सकल घरेलू उत्पाद कहते है। जीडीपी का उपयोग किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को मापने के लिए किया जाता है। अगर किसी देश की जीडीपी बढ़ती है तो उस देश की आर्थिक अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है। यदि जीडीपी गिरती है तो इसका अर्थ है कि उस देश की अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है। आसान शब्दों में अगर हम आपको समझाए तो जीडीपी किसी भी देश के अर्थव्यवस्था का रिपोर्ट कार्ड है। देश की सामुहिक अर्थव्यवस्था साल भर जैसा वर्क करती है रिपोर्ट वैसा ही आता है। जीडीपी की वैल्यू को आठ सेक्टरों के इकोनॉमिक स्थिति से कैलकुलेट किया जाता है। देश की कृषि, मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिसिटी, माइनिंग, ट्रेड और कम्युनिकेशन, रियल एस्टेट, इंश्योरेंस, बिजनेस सर्विसेज और सार्वजनिक सेवाएं जीडीपी तय करती है। जीडीपी इन आठो सेक्टर के सामूहिक प्रदर्शन का एक योग होता है।
पीपीपी क्या है
पीपीपी का अर्थ है क्रय शक्ति समानता। पीपीपी का इस्तेमाल विश्व की सभी देशों में एक समान वस्तुओं की कीमत के स्तर की तुलना करने के लिए किया जाता है। विश्व बैंक के जारी आंकड़ों के अनुसार भारत पीपीपी के आधार पर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। पीपीपी के डाटा के मुताबिक ग्लोबल जीडीपी में भारत की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2021 में 10.22 फीसदी थी। अगर दूसरे शब्दों में कहे तो पिछले साल दुनिया की कुल जीडीपी में भारत की हिस्सेदारी 10,510 अरब डॉलर की रही । वर्ल्ड जीडीपी में चीन की हिस्सेदारी 27.31 फीसदी और अमेरिका का योगदान 23 फीसदी रहा। भारत पीपीपी के डाटा में जापान और जर्मनी से आगे है। पीपीपी एक वस्तु की कीमत की समानता को चेक करने का मापक है। मतलब अगर कोई वस्तु भारत में 2 हजार की है तो विश्व के मार्केट में भी इसकी कीमत भारतीय 2 हजार के बराबर ही होनी चाहिए।
भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी
भारत की आबादी दुनिया की दुसरी सबसे बड़ी आबादी है। आबादी अधिक होने के कारण प्रति व्यक्ति जीडीपी 2170 डॉलर है। तो वहीं अगर हम अमेरिका से तुलना करें तो वहा प्रति व्यक्ति जीडीपी 62,794 डॉलर है। भारत के लिए जीडीपी में पिछड़ना ठीक संदेश नहीं है।
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