नई दिल्ली, अक्टूबर 03। भारत में सभी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से आधी देरी से चल रही हैं, और चार में से एक अपने अनुमानित बजट से अधिक का बजट ले रही है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का मानना है कि प्रौद्योगिकी के रास्ते में आने वाले बड़े बाधाओं का भी समाधान है। 100 लाख करोड़ रुपये (1.2 ट्रिलियन डॉलर) की मेगा परियोजना के तहत पीएम गति शक्ति योजना की स्पीड और ताकत को बढ़ाने के लिए सरकार एक डिजिटल प्लेटफॉर्म बना रही है। यह डिजिटल प्लेटफार्म 16 मंत्रालयों को जोड़ेगा। यह पोर्टल निवेशकों और कंपनियों को परियोजनाओं के डिजाइन, लागत समेत तमाम समस्याओं का समाधान एक ही जहग प्रदान करेगा।
कम लागत में परियोजनाओं को पूरा करना है लक्ष्य
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय में लॉजिस्टिक्स के विशेष सचिव अमृत लाल मीणा ने कहा कि इस प्रयास का मिशन समय के अधिन और लागत में वृद्धि के बिना परियोजनाओं को लागू करना है। उन्होंने आगे कहा की कंपनियों को भारत को अपने विनिर्माण केंद्र के रूप में चुनाव कराना योजना का लक्ष्य है। फास्ट-ट्रैकिंग परियोजनाएं भारत को एक फायदा देगी यह विशेष रूप से चीन के बाजार में विनिर्माण न करने की योजना बना रही कंपनियों को भारत के तरफ आकर्षित करेंगी। भारत दुनिया की एक उभरती हुई अर्थव्यस्था है और यहां सस्ते और अच्छे कामगरों की भरमार है।
चीन से है प्रतिस्पर्धा
केर्नी इंडिया के पार्टनर अंशुमान सिन्हा ने मिडीया से कहा कि चीन के साथ प्रतिस्पर्धा करने का एकमात्र तरीका है कि देश के बुनियादी ढाचें को मजबूत करके विदेशी कंपनियों को आकर्षित करना। गति शक्ति योजना देश की माल और निर्मित प्रोडक्ट के डिस्ट्रिब्यूशन को आसान बनाने के लिए है। उन्होंने कहा कि परियोजना के प्रमुख स्तंभ नए उत्पादन समूहों की पहचान करने में लगे हैं। हम आज दूर दराज के व्यसायों को देश के रेलवे नेटवर्क, बंदरगाहों और हवाई अड्डों से जोड़ रहे हैं।
परियोजनाओं में है विलंब
वर्तमान में गति शक्ति के पोर्टल की देखरेख वाली 1,300 परियोजनाओं में से लगभग 40 प्रतिशत भूमि अधिग्रहण, वन और पर्यावरण मंजूरी से संबंधित मुद्दों के कारण विलंबित हैं। इस कारण से लागत बढ़ गई है। 422 परियोजनाओं में कुछ मुद्दे लंबित थे जिनमें पोर्टल के माध्यम से 200 के समस्याओं का समाधान किया गया है। गति शक्ति देश को नई दिशा दे रही है।


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