नयी दिल्ली। सीमा विवाद के बाद भारतीय कस्टम बढ़ाई गई सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर बंदरगाहों पर चीन से आने वाले 100 फीसदी सामानों की जांच कर सकता है। इस कदम के पीछे का उद्देश्य चीन से आयात को हतोत्साहित करना हो सकता है, क्योंकि ऐसा करने से चीनी कंसाइंमेंट के रिलीज होने में देरी हो सकती है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि सरकार ने इस तरह के कोई निर्देश जारी नहीं किए और कंटेनरों को जोखिम असेसमेंट या खुफिया इनपुट के आधार पर रखा जा सकता है। चीनी सामानों के आयात पर इतनी बारीक जांच करने वाला चेन्नई पहला बंदरगाह है। आगे इस प्रोसेस को सभी प्रमुख बंदरगाहों पर भी शुरू किया जा सकता है। चेन्नई कस्टम्स ब्रोकर्स एसोसिएशन ने एक बयान में कहा है कि कस्टम्स की तरफ से एक इंटरनल निर्देश दिया गया है जो सभी पोर्ट टर्मिनल, एयरपोर्ट और सभी कस्टम फ्रेट स्टेशंस के लिए है। निर्देश में चीन से आने वाले सभी कंसाइंमेंट को रोकने को कहा गया है।
अभी होती है 30 फीसदी सामान की जांच
अभी केवल 30 फीसदी सामान की जांच होती है। मौजूदा समय में कुल आयात का 70 फीसदी ग्रीन चैनल के माध्यम से एंट्री बिल भरने के बाद पास हो जाता है। इस ऑनलाइन प्रोसेस में बहुत कम दिक्कत आती है। जबकि 30 फीसदी सामान की जांच की जाती है। सामान की जांच में ये देखा जाता है कि सब कुछ एंट्री बिल के समान हो, सामानों की वैल्यू सही बताई गई हो और सभी सामान शुल्क से छूट वाला हो। नए कदम से क्लियरेंस में होगी। खास कर कोरोनावायरस की वजह से कम स्टाफिंग के कारण। कई मामलों में चेकिंग के लिए आयातकों की उपस्थिति में सामान को अनपैक करना होगा।
इन सामानों के लिए चेन्नई पोर्ट जरूरी
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इंडस्ट्री के सूत्रों के मुताबिक चेन्नई बंदरगाह देश में कारोबार करने वाली कई चीनी कंपनियों के लिए टेलीकॉम पार्ट्स और उपकरणों के लिए एक मुख्य प्रवेश द्वार है। चेन्नई चीन से ऑटो कम्पोनेंट के आयात के लिए भी एक प्रमुख बंदरगाह है। वैसे क्लियरेंस रोकने के लिए कोई औपचारिक निर्देश नहीं है लेकिन आयातकों को कंसाइनमेंट नहीं मिले हैं। आयातकों को बताया गया है कि कोरोना के मद्देनजर कंसाइनमेंट की जांच और सेनिटाइज्ड किए जाने की जरूरत है। इससे इंडस्ट्री पर बुरा असर पड़ रहा है, कई कंसाइनमेंट अटक गए हैं, जिससे कुछ आयातकों ने स्थानीय कस्टम अधिकारियों के सामने इस मुद्दे को उठाया।
जल्द निकल सकता है समाधान
सभी सामानों की मैनुअल चेकिंग उद्योग के लिए मुसीबत बन रही है। इंडिया सेलुलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (आईसीईए) के अध्यक्ष पंकज मोहिन्द्रू के अनुसार इससे भारत के जरूरी उत्पादन के अलावा निर्यात पर भी असर पड़ेगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आईसीईए के सदस्यों में भारतीय कंपनी लावा के अलावा फॉक्सकॉन, ओप्पो, वीवो, फ्लेक्सट्रॉनिक्स और एप्पल भी शामिल हैं। हालांकि ऐसी भी उम्मीद जताई जा रही है कि इस मामले का समाधान जल्द निकल सकता है। चीन से कंटेनरों को स्वीकार करने या न करने के लिए कोई भी आदेश, मौखिक या लिखित, कस्टम या केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और कस्टम (CBIC) द्वारा किसी भी बंदरगाह को जारी नही किया गया है।


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