नई दिल्ली। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के मोर्चे पर बड़ी खबर आई है। चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में भारत की जीडीपी पॉलिटिव हो गई है। चालू वित्त वर्ष की पहली और दूसरी तिमाही में जीडीपी में भारी गिरावट दर्ज हुई थी। आज यहां सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर से दिसंबर 2020) में जीडीपी में 0.4 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है।

8 फीसदी रह सकती है पूरे साल की जीडीपी में गिरावट
इन आंकड़ों में जीडीपी में वित्त वर्ष 2020-21 में 8 फीसदी की गिरावट आने का अनुमान जताया गया है। जीडीपी के इन आंकड़ों का सबको बेसब्री से इंतजार था। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की तरफ से जारी आंकड़े में अप्रैल से जनवरी के दौरान राजकोषीय घाटा 12.34 लाख करोड़ रुपये का होने की जानकारी दी गई है।
ये हैं अन्य अनुमान
स्थिर कीमतों (2011-12) पर वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान देश की वास्तविक जीडीपी 134.09 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि 29 जनवरी 2021 को जारी 2019-20 के प्रथम संशोधित अनुमान में देश की जीडीपी 145.69 लाख करोड़ रहने का अनुमान लगाया गया था। इस प्रकार 2020-21 में जीडीपी वृद्धि दर माइनस आठ फीसदी (-8 फीसदी) रहने का अनुमान है, जबकि 2019-20 में जीडीपी वृद्धि दर चार फीसदी दर्ज की गई थी।
ये हैं स्थिर कीमतों पर अनुमान
वहीं, स्थिर कीमतों (2011-12) पर वित्त वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही में देश की जीडीपी 36.22 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि 2019-20 की समान अवधि के दौरान यह आंकड़ा 36.08 लाख करोड़ रुपये था। इस प्रकार, चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 0.4 फीसदी रहने का अनुमान है।
पहली तिमाही में आई थी 23.9 फीसदी की कमी
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी में 23.9 फीसदी कमी आई थी। पिछले 40 साल में पहली बार जीडीपी में कमी दर्ज की गई थी। अप्रैल से जून के दौरान ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) में 22.8 फीसदी कमी दर्ज की गई थी। पहली तिमाही में माइनिंग में 23.3 फीसदी कमी और मैन्युफैक्चरिंग में 39.3 फीसदी कमी दर्ज हुई थी।
दूसरी तिमाही में दर्ज हुई थी गिरावट
चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 7.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। दूसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था पूरी तरह खुल गई थी। इसलिए जीडीपी में कम गिरावट दर्ज की गई थी।
क्या होती है जीडीपी
ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट यानी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) किसी एक साल में देश में पैदा होने वाले सभी सामानों और सेवाओं की कुल वैल्यू को कहते हैं। जीडीपी किसी देश के आर्थिक विकास का सबसे बड़ा पैमाना है। अधिक जीडीपी का मतलब है कि देश की आर्थिक बढ़ोतरी हो रही है। अगर जीडीपी बढ़ती है तो इसका मतलब है कि अर्थव्यवस्था ज्यादा रोजगार पैदा कर रही है। इसका यह भी मतलब है कि लोगों का जीवन स्तर भी आर्थिक तौर पर समृद्ध हो रहा है। इससे यह भी पता चलता है कि कौन से क्षेत्र में विकास हो रहा है और कौन सा क्षेत्र आर्थिक तौर पर पिछड़ रहा है।
More From GoodReturns

Gold Price: Gold से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव, निवेशकों के लिए बड़ा झटका अब देना होगा टैक्स!

Gold Rate Today: 27 मार्च को फिर से सोने की कीमतों में तेजी! जानिए 24k, 22k, 18k गोल्ड रेट क्या है?

Silver Price Today: 29 मार्च रविवार को चांदी सस्ता हुआ या महंगा? जानें प्रति किलो चांदी का भाव

Gold Price Today: 29 मार्च को सोना सस्ता हुआ या महंगा? खरीदने से पहले जानें आज का ताजा भाव

Silver Price Today: 28 मार्च को चांदी की कीमतों में उछाल, जानिए प्रति किलो कितना महंगा हुआ चांदी का भाव

Gold Rate Today: 30 मार्च को सोने की कीमतों में आई बड़ी गिरावट! जानिए 24k, 22k, 18k गोल्ड रेट क्या है?

Silver Price Today: 31 मार्च को चांदी की कीमतों में आई गिरावट! जानिए प्रति किलो चांदी का रेट क्या है?

Gold Rate Today: 1 अप्रैल को सोने की कीमतों में आई जबरदस्त तेजी! जानिए 24k, 22k,18k गोल्ड रेट क्या है?

Silver Price Today: 30 मार्च को चांदी का भाव सस्ता हुआ या महंगा? जानें प्रति किलो चांदी का रेट

Silver Price Today: 1 अप्रैल को चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी! जानिए प्रति किलो चांदी का भाव

Gold Rate Today: महीने के आखिरी दिन 31 मार्च को सोने की कीमतों में बड़ा बदलाव! जानिए 24k, 22k गोल्ड रेट



Click it and Unblock the Notifications