India's second quarter GDP: भारत की चालू वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में जीडीपी ग्रोथ रेट 7.6 प्रतिशत रही है। वहीं जीडीपी की यह ग्रोथ पिछले साल समान तिमाही में 6.2 प्रतिशत रही थी। वहीं चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2023) में भारत की जीडीपी 7.8 फीसदी रही थी। यह आंकड़े आज एनएसओ की तरफ से जारी किए गए हैं।
आंकड़ों में जीडीपी
- भारत की जुलाई-सितंबर जीवीए वृद्धि 7.4% बनाम अप्रैल-जून में 7.8% रही
- भारत की जुलाई-सितंबर में कृषि वृद्धि 1.2% बनाम अप्रैल-जून में 3.5% रही
- भारत की जुलाई-सितंबर में विनिर्माण वृद्धि 13.9% बनाम अप्रैल-जून में 4.7% रही
- भारत के जुलाई-सितंबर में निर्माण क्षेत्र की वृद्धि अप्रैल-जून में 7.9% के मुकाबले 13.3% रही

जीडीपी के अन्य महत्वपूर्ण आंकड़े
- माइनिंग ग्रोथ 0.1% से बढ़कर 10% (साल दर साल)
- माइनिंग ग्रोथ 5.8% से बढ़कर 10% (तिमाही दर तिमाही)
- मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ 3.8% से बढ़कर 13.9% (साल दर साल)
- मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ 4.7% से बढ़कर 13.9% (तिमाही दर तिमाही)
- इलेक्ट्रिसिटी ग्रोथ 6% से बढ़कर 10.1% (साल दर साल)
- इलेक्ट्रिसिटी ग्रोथ 2.9% से बढ़कर 10.1% (तिमाही दर तिमाही)
- ट्रेड, होटल ग्रोथ 15.6% से घटकर 4.3% (साल दर साल)
- ट्रेड, होटल ग्रोथ 9.2% से घटकर 4.3% (तिमाही दर तिमाही)
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि सितंबर तिमाही में भी भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। उन्होंने कहा कि जुलाई-सितंबर 7.6 प्रतिशत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर अर्थशास्त्रियों द्वारा 7.4 प्रतिशत या उसके आसपास के उच्चतम पूर्वानुमान से भी अधिक है।
वहीं कुछ दिन पहले मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने कहा था कि इस साल भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.5 फीसदी रह सकती है। वहीं मॉर्गन स्टेनली ने भी इसी सप्ताह कहा है कि भारत की आर्थिक वृद्धि दर वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 में 6.5 फीसदी के आस-पास रह सकती है। वहीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अर्थव्यवस्था का जिक्र करते हुए भरोसा जाहिर किया कि 2027 तक भारत जीडीपी के मामले में दुनिया के टॉप-3 देशों में से एक बन जाएगी। अभी भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
भारत की Q2 जीडीपी को लेकर ये थे अनुमान
- भारतीय क्रेडिट रेटिंग कंपनी (आईसीआरए) ने दूसरी तिमाही में 7 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि की भविष्यवाणी की थी।
- डेलॉयट इंडिया को उम्मीद है कि जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी 6.7 प्रतिशत के आसपास बढ़ेगी।
- इंडियन क्रेडिट रेटिंग कंपनी (ICRA) ने दूसरी तिमाही जीडीपी में 7 फीसदी ग्रोथ का अनुमान जताया था।
जीडीपी आंकड़ों का शेयर बाजार पर क्या रहेगा असर
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार, वीके विजयकुमार के अनुसार वैश्विक संकेत सहित अमेरिका से सकारात्मक खबरें आ रही हैं। ऐसे में भारत की दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहने की उम्मीद है। अगर इन अच्छे मैक्रोज़ को बाजार की उम्मीदों के अनुरूप आने वाले आज के एग्जिट पोल नतीजों का समर्थन मिलता है, तो जल्द ही रिकॉर्ड ऊंचाई पर रैली हो सकती है।
वहीं थोड़ी देर पहले ही आज लेखा महानियंत्रक की तरफ से जारी आंकड़ों से पता चलता है कि केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा अप्रैल-सितंबर में 7.02 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर अप्रैल-अक्टूबर में 8.04 लाख करोड़ रुपये हो गया। 8.04 लाख करोड़ रुपये पर, चालू वित्त वर्ष के पहले सात महीनों के लिए राजकोषीय घाटा पूरे साल के लक्ष्य 17.87 लाख करोड़ रुपये का 45.0 प्रतिशत है। वहीं अप्रैल-अक्टूबर 2022 में राजकोषीय घाटा 2022-23 के लक्ष्य का 45.6 प्रतिशत था।
ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट यानी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) किसी एक साल में देश में पैदा होने वाले सभी सामानों और सेवाओं की कुल वैल्यू को मिलाकर होता है। जानकारों के अनुसार जीडीपी ठीक वैसी ही है, जैसे किसी छात्र की मार्कशीट है। बस यह देश की मार्कशीट होती है। जिस तरह मार्कशीट से पता चलता है कि छात्र ने सालभर में कैसा प्रदर्शन किया है और किन विषयों में वह मजबूत या कमजोर रहा है। उसी तरह जीडीपी आर्थिक गतिविधियों के स्तर को दिखाता है। इससे यह भी पता चलता है कि किन सेक्टरों की वजह से इसमें तेजी या गिरावट आई है। भारत में सेंट्रल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (सीएसओ) साल में 4 बार जीडीपी का आकलन करता है। यह कार्यालय हर तिमाही में जीडीपी का आकलन करके आंकड़े जारी करता है।
दुनिया की टॉप 5 अर्थव्यवस्थाएं
- अमेरिका: 26,954 बिलियन डॉलर
- चीन: 17,786 बिलियन डॉलर
- जर्मनी: 4,430 बिलियन डॉलर
- जापान: 4,231 बिलियन डॉलर
- भारत: 3,730 बिलियन डॉलर
नोट: आईएमएफ डेटा (16 अक्टूबर, 2023 तक) के लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार।
केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय देश में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की गणना के लिये आधार वर्ष को 2011-12 मानता है। आधार वर्ष एक प्रकार का बेंचमार्क होता है, जिसके संदर्भ में राष्ट्रीय आँकड़े जैसे- सकल घरेलू उत्पाद, सकल घरेलू बचत और सकल पूंजी निर्माण आदि की गणना की जाती है।
जीडीपी 2 प्रकार की होती है। पहला है नॉमिनल जीडीपी और दूसरा है वास्तविक जीडीपी। नॉमिनल जीडीपी चालू कीमतों (वर्तमान वर्ष की प्रचलित कीमत) में व्यक्त सभी वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को मापता है। वहीं वास्तविक जीडीपी में नॉमिनल जीडीपी के विपरीत यह किसी आधार वर्ष की कीमतों पर व्यक्त की गई सभी वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को बताता है।
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