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जिस देश के पास मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार होता है, उस देश की आर्थिक स्थिति भी अच्छी मानी जाती है। ऐसा इसलिए होता है कि अगर दुनिया में कोई दिक्कत आ जाए तो देश अपनी जरूरत का सामान कई माह तक आसानी से मंगा सकता है। इसीलिए दुनिया के बहुत से देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार को काफी मजबूत बना कर रखते हैं।
अक्टूबर, 2021 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 645 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि उसके बाद में वैश्विक घटनाओं के कारण पैदा हुए दबावों के बीच रुपये को संभालने के लिए मुद्रा भंडार का उपयोग करने से इस भंडार में गिरावट आ गई थी।
रिजर्व बैंक के साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार, 16 जून 2023 को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार का अहम हिस्सा विदेशी मुद्रा आस्तियां 2.578 अरब डॉलर बढ़कर 527.651 अरब डॉलर हो गईं थीं। डॉलर में अभिव्यक्त की जाने वाली विदेशी मुद्रा आस्तियों में यूरो, पौंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं में आई घट-बढ़ के प्रभावों को भी शामिल किया जाता है।
हालांकि इस दौरान रिजर्व बैंक ने बताया है कि गोल्ड रिजर्व की वैल्यू 32.4 करोड़ डॉलर कम होकर 45.049 अरब डॉलर बची है।
वहीं आंकड़ों के अनुसार, विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 6.2 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.249 अरब डॉलर हो गया है। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, समीक्षाधीन सप्ताह में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास रखा हुआ देश का मुद्रा भंडार 3.4 करोड़ डॉलर बढ़कर 5.149 अरब डॉलर हो गया।
विदेशी मुद्रा के मामले में दुनिया के टॉप 5 देश
- चीन 3.40 ट्रिलियन डॉलर
- जापान 1.25 ट्रिलियन डॉलर
- स्विट्जरलैंड 912,241 बिलियन डॉलर
- भारत 596,098 बिलियन डॉलर
- रूस 587,500 बिलियन डॉलर


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