नई दिल्ली। कोरोना वायरस के चलते देश और दुनियाभर में लॉकडाउन रहने से कारोबार प्रभावित हुआ है। लेकिन इस बीच भी भारत का विदेशी मुद्रा भंडार काफी तेजी से बढ़ा है। 15 मई को समाप्त सप्ताह के दौरान देश का विदेशी मुद्रा भंडार 1.73 अरब डॉलर और बढ़कर 487.04 अरब डॉलर हो गया। यह विदेशी मुद्रा भंडार देश के 12 महीने के आयात के बराबर है।

आरबीआई ने जारी किए आंकड़े
भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई की तरफ से जारी आंकड़ों मुताबिक 1 अप्रैल से 15 मई के बीच देश के विदेशी मुद्रा भंडार में 9.2 अरब डॉलर का इजाफा हुआ। आठ मई को समाप्त सप्ताह पर यह 485.31 अरब डॉलर था। छह मार्च को समाप्त हफ्ते में यह अपने सर्वकालिक उच्च स्तर 487.23 अरब डॉलर पर था।
ये है बढ़ने का कारण
समीक्षावधि में हुई बढ़ोत्तरी की मुख्य वजह विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (एफसीए) में वृद्धि होना है। कुल विदेशी मुद्रा भंडार में एफसीए का प्रमुख हिस्सा होता है। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान एफसीए 1.12 अरब डॉलर बढ़कर 448.67 अरब डॉलर हो गया। एफसीए में अमेरिकी डॉलर के अलावा यूरो, पौंड और येन जैसी मुद्राएं भी शामिल हैं।
स्वर्ण भंडार भी बढ़ा
इस दौरान देश के विदेशी मुद्रा भंडार में स्वर्ण भंडार 61.6 करोड़ डॉलर बढ़कर 32.91 अरब डॉलर हो गया। समीक्षावधि में देश को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मिला विशेष आहरण अधिकार 20 लाख डॉलर बढ़कर 1.42 अरब डॉलर हो गया।
आरबीआई गवर्नर ने क्या कहा
पिछले दिनों आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने एक प्रेस वार्ता के दौरान लॉकडाउन के चलते अर्थव्यवस्था में कमजोरी का संकेत किया, लेकिन साथ ही बताया कि इस वक्त में इतना विदेशी मुद्रा भंडार है कि हम अपनी जरूरत का 1 साल तक बिना किसी दिक्कत के आयात कर सकते हैं। हालांकि आंकड़ों के अनुसार यह बात सिद्धांतों के अनुसार कही गई है। इसका मतलब है कि अगर सबसे खराब समय आए तो भी भारत 1 साल तक बिना किसी दिक्कत के अपनी जरूरत का सामान आयात कर सकता है।
यह भी पढ़ें : Jio Mart : भारी कमाई के लिए तुरंत बनें डिस्ट्रीब्यूटर, ये है तरीका


Click it and Unblock the Notifications